Friday, October 7, 2022
to day news in chandigarh
Homesingle newsर्द्धसैनिक बलों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बाद बीएसएफ ने सभी...

र्द्धसैनिक बलों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बाद बीएसएफ ने सभी कर्मियों के लिए एक वार्षिक परीक्षा अनिवार्य कर दी है।

आई 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोर्ट  अर्द्धसैनिक बलों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बाद बीएसएफ ने सभी कर्मियों के लिए एक वार्षिक परीक्षा अनिवार्य कर दी है। जिससे पता चलेगा कि वह मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं या नहीं। उनके टेस्ट के आधार पर ही उन्हें ड्यूटी दी जाएगी और उनकी समस्या दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अभी तक जवानों के स्वास्थ्य का पता लगाने के लिए केवल वार्षिक फिजिकल टेस्ट ही लिया जाता था।

इसके लिए बीएसएफ ने दिशा-निर्देषों का एक सेट तैयार किया है जिसमें उनके मनोरंजन का समय सुनिश्चित किया गया है, वहीं उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर समय-समय पर बैठकें भी आयोजित की जाएंगी जिसमें सभी जवान अपनी व्यक्तिगत कहानियां भी साझा करेंगे। वहीं जो जवान छुट्टी से लौटेंगे उनका साक्षात्कार लिया जाएगा। साथ ही जवानों को हो रहीं परेशानियों और शिकायतों का पता लगाने के लिए भी एक औपचारिक तंत्र शुरू किया जा रहा है।

बता दें कि सरकार पिछले एक साल से जवानों में लगातार बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं और उनके कारणों पर अध्ययन किया गया। इसके लिए तकरीबन 2,000 बीएसएफ चिकित्सकों को क्लीनिकल मनोविज्ञान में ट्रेनिंग दी गई। यह ट्रेनिंग लंदन के मनोचिकित्सकों के सलाह के बाद दी गई ताकि वह परीक्षा लेकर जवानों के मानसिक स्वास्थ्य का पता लगा सकें। इस प्रोग्राम का नाम ‘हॉलिस्टिक वेल बींग इंटरवेन्शन’ (समग्र भलाई हस्तक्षेप) रखा गया है।

अधिकारियों के मुताबिक जांच से पता चला है आत्महत्या के मामले उन्हीं कर्मियों में अधिक देखे गए हैं जिनकी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर है। इनमें से ज्यादातर की उम्र 25-35 के बीच में थी। उन्होंने बताया कि अगर हम वैवाहिक स्थिति, संयुक्त परिवार और एकल परिवार से संबंधिक कर्मियों की बात करें तो उनके आत्महत्या के कारणों में ज्यादा अंतर नहीं था। अकसर कहा जाता है कि आत्महत्या करने वालों में ज्यादातर न्यूक्लियर परिवार में रह रहे लोग होते हैं वहीं जांच में पता चला है कि ऐसा करने वाले 51 फीसदी जवान एकल परिवार से थे। जबकि 49 फीसदी संयुक्त परिवार से थे।

उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे कारण भी हैं जो सबसे पहले तनाव उत्पन्न करते हैं, फिर डिप्रैशन और आखिर में बात आत्महत्या तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे के कारण कमजोर प्रेरणाशक्ति, शराब पर निर्भरता, नींद ना आना, अकेलापन, परिवार के सदस्यों से संबंधित कोई समस्या, काम करने की प्रतिकूल स्थितियां, वित्तिय परेशानी, क्रोध और असाहयता हैं।

इंस्पेक्टर जनरल सतवंत अतवल त्रिवेदी के मुताबिक आत्महत्या बहुत दुखद होती है लेकिन अगर कोई प्रशिक्षित जवान ऐसा करे तो वह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि जवानों को एक अच्छा वातावरण देने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे ताकि वह ऐसा कोई कदम ना उठाएं। अगर परेशानियों का जल्द ही पता लगा लिया जाए और उन पर ध्यान दिया जाए तो हादसों को टाला जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक क्षेत्रीय यूनिटों में जल्द ही बुकलेट जारी की जाएंगी ताकि तनावग्रस्त जवानों की मदद की जा सके। साथ ही ग्रुप गेम, अच्छी डाइट और उचित स्वास्थ्य सेवा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा यह भी ध्यान दिया जाएगा कि उन्हें गेम खेलने, किताब पढ़ने और फिल्म देखने का समय मिल सके। इसके साथ ही ‘घर की बात’ जैसे सेशन्स भी आयोजित होंगे ताकि जवान अपनी परेशानियां और अनुभव साझा कर सकें।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments