Thursday, August 11, 2022
to day news in chandigarh
Homesingle newsदो वक्त की रोटी की भी मोहताज हुआ करती थी, की 50...

दो वक्त की रोटी की भी मोहताज हुआ करती थी, की 50 लाख की जमीन देवता के नाम

 

आई 1 न्यूज़ : संदीप कश्यप (राजगढ़)

आज के युग में जहां एक एक इंच जमीन पर भी मुकद्दमें लड़े जाते हैं और भाई भाईका दुश्मन हो जाता है वहीं शाया गांव की एक महिला ने लगभग 50 लाख की अपनी सारी जमीन शिरगुल देवता के नाम कर दी है। चिंता देवी नाम की इस महिला से जब इस बड़ी भेंट बारे पूछा गया तो उसने बताया कि आज मैं पैंशन लेती हूं और अपना गुजारा बड़े आराम से हो जाता है मगर कभी वो भी दिन थे जब मैं दो वक्त की रोटी की भी मोहताज हुआ करती थी।

उन्हीं दिनों की बात है। एक दिन मैं इसी सोच में अपने मकान के बाहर बैठी थी कि आज का खाना कैसे बनेगा कि तभी मेरी नजर सामने विराजमान शिरगुल मंदिर पर पड़ी और मेरे मुंह से निकल पड़ा, ‘‘देवा शिरगला एबे तू ही जाणे’’ यानी शिरगुल महाराज मेरी हालत का तुम्हें ही अंदाजा है। कुछ देर बाद मैंयूंही अपने खेत की ओर चल पड़ी तभी एक देवदार के पेड़ के नीचे, देवदार की शक्ल के छोटे छोटे पौधे जैसे़ दिखाई दिए।

मैंने सुना तो था मगर कभी देख नहीं था कि गुच्छी इस प्रकार की होती है। मैं सारी गुच्छियां उठा कर घर ले आई और पति के घर आने पर बताया कि ये क्या है। उन्होंने बताया कि ये गुच्छियां हैं। मैंने उनको कहा कि जाओ इसे बेच कर उसका आटा ले आओ। वे गये और बेच कर दो किलो आटा ले आए और हमारी दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो गया। दूसरे दिन से फिर मैं साथ लगते जंगलों में उन गुच्छियों को ढूंढने लगी और खाने का इंतजाम होने लगा मगर गुच्छी का सीजन समाप्त हो गया और फिर वही फाके के दिन आ गए। मैंने फिर शिरगुल महाराज को पुकारा।

उसी रात मुझे सपना आया कि एक बुजुर्ग पल्ले में आटा ले कर आया और मुझे दे दिया। दूसरे दिन से हमारे दिन बदलने लगे और किसी भी प्रकार की कमी महसूस नहीं हुई। हालांकि आज मैं अकेली हूं और काफी मुसीबत में पड़ सकती थी परन्तु शिरगुल महाराज ने मेरे गुजारे का प्रबंध पहले ही कर दिया था। उनकी ही कृपा रही कि मुझे पति के देहावसान के बाद सरकारी नौकरी मिल गई थी। अब मेरी जरूरतें आराम से पूरी हो रही हैं इसलिए शिरगुल महाराज के प्रताप से मिली जमीन को उनको ही अर्पण कर दी है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments