बहादुर बच्चों के राष्ट्रीय पुरस्कार पर मंडराया खतरा, मंत्रालय ने दर्ज कराई एफआईआर

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ऑय 1 न्यूज़ 19 जनवरी 2019 (रिंकी कचारी) हर साल देश के उन बहादुर बच्चों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना वीरतापूर्वक किसी परिस्थिति का सामना किया है। इस साल इन बच्चों को मिलने वाले पुरस्कार पर खतरा मंडरा रहा है क्योंकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने (इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर) आईसीसीडब्लयू पर वित्तिय धोखाधड़ी के कारण एफआईआर दर्ज करवाई है।

इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने खुद को इस एनजीओ से अलग कर लिया था। हालांकि सरकार विजेताओं को भी समर्थन करेगी। मंत्रालय के अलग होने के बाद इस योजना को बदला जा रहा है और अब इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के अंतकर्गत लाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि एनजीओ पर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

साल 1957 से ही एनजीओ देशभर में बहादुरी का काम करने वाले बच्चों के नामों का चयन करते हुए पुरस्कार देती थी। इसमें केंद्र सरकार सहयोग करती थी और गणतंत्र दिवस की परेड में उक्त बहादुर बच्चों को शामिल किया जाता रहा है। पिछले 61 सालों में 963 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस परेड से पहले होनहार बच्चों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिलता था।

सरकार के सहयोग के बगैर भी देते रहेंगे पुरस्कार

गीता का कहना है कि केंद्र सरकार ने बेशक अदालत में वित्तीय अनियमतिता के केस के चलते राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 में खुद को अलग कर लिया है, लेकिन एनजीओ बहादुर बच्चों को यह पुरस्कार देता रहेगा। गीता से जब उनके एनजीओ पर वित्तीय अनियमितता का सवाल पूछा गया तो कहा उनका कहना था कि मामला अदालत में विचाराधीन है। इसलिए इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह सकती हूं।

विवाद के बाद भी परिषद 21 बहादुर बच्चों को देगी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

भारतीय बाल कल्याण परिषद (एनजीओ) 21 बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 से सम्मानित करने जा रहा है। यह राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018 एनजीओ की ओर से दिया जाने वाला पुरस्कार होगा, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। भारतीय बाल कल्याण परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने शुक्रवार को बहादुर बच्चों के नामों की घोषणा की। इसमें जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से सीधा मुकाबला करने पर सेना के दो परिवारों के दो बच्चों गुरूगु हिमाप्रिया और सौम्यादीप जना को एनजीओ का सर्वोच्च भारत अवार्ड दिया जाएगा।

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