मुंबई डांस बार : गंदा था पर ‘दो लाख करोड़’ का धंधा था ये

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ऑय 1 न्यूज़ 18 जनवरी 2019 (रिंकी कचारी) ‘गंदा है पर धंधा है ये’, बॉलीवुड की एक मशहूर फिल्म का यह डायलॉग डांस बार के धंधे पर बिल्कुल फिट बैठता है, जिसकी करीब डेढ़ दशक पहले तक देश की आर्थिक राजधानी कहलाने वाली मुंबई की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ी हिस्सेदारी थी। लाखों लोगों की आजीविका चलाने वाला डांस बार का धंधा कोई छोटा-मोटा व्यापार नहीं, बल्कि दो लाख करोड़ रुपये की वैध-अवैध अर्थव्यवस्था थी। धंधे के जानकारों की मानी जाए तो अगस्त 2005 में जब डांस बार बंद किए गए, तब इसका सालाना वैध कारोबार ही 40 से 42 हजार करोड़ रुपये का था। इस हिसाब से देखा जाए तो पिछले डेढ़ दशक में सरकार को कई लाख करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा हुआ है।

खास बातें

  • 2005 में प्रतिबंध लगाया था सरकार ने डांस बार चलाने पर
  • 20 से 22 हजार वैध-अवैध डांस बार थे मुंबई में बंदी के समय
  • 800 डांस बार ही पंजीकृत थे सरकारी आंकड़ों में
  • 02 से ढाई हजार डांस बार प्रतिबंध के बावजूद चल रहे
  • 75 हजार के करीब डांसर थीं मुंबई के डांस बारों में बंदी के समय
  • 35 हजार ही अब भी वेटर या गायिका के तौर पर काम कर रहीं
  • 40 हजार ने डांस बार बंद होने पर पकड़ लिए थे दूसरे धंधे

मुंबई की डांस बार संस्कृति पर गहन अध्ययन करके ‘बॉम्बे बार’ शीर्षक से किताब लिखने वाले विवेक अग्रवाल ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में बताया कि डांस बार के व्यवसाय में शराब, डांसरों पर विभिन्न मदों में होने वाले खर्च और वेश्यावृत्ति से लेकर पुलिस को दिया जाने वाला हफ्ता शामिल है। अकेले मुंबई पुलिस का हफ्ता ही करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का होता था

डांस बारों के बिजनेस में उद्योगपतियों के साथ-साथ पुलिस और राजनेता भी शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि मुंबई के एक प्रमुख राजनीतिक दल के शीर्ष नेताओं की ही पांच डांस बार में हिस्सेदारी है। यह भी कहा जाता है कि डेढ़ दशक पहले तक इस दल की आय का बड़ा स्रोत ये डांस बार ही थे। यह भी कहा जाता है कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री आरआर पाटिल ने अपने प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए ही डांस बार पर प्रतिबंध का दांव खेला था।

किसने क्या कहा
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष अदालत ने बांबे हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार नहीं रखा है, क्योंकि 2016 में लाए गए कानून के पीछे पवित्र मकसद था। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रावधान में संशोधन क्यों किए? क्या ये प्रावधान असंवैधानिक थे या हम अपना पक्ष प्रभावी तरीके से नहीं रख पाए? विधेयक को फुलप्रूफ नहीं बनाना सरकार की विफलता है। -अनिल परब, वरिष्ठ शिवसेना नेता

हम अदालत के निर्णय के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन इस निर्णय के दायरे में रहकर भी सरकार सतर्कता बरतेगी कि डांस बार के नाम पर किसी तरह की अवैध गतिविधि संचालित नहीं की जाए। -रंजीत पाटिल, गृह मंत्री, महाराष्ट्र सरकार

एनसीपी और सरकार आमने-सामने
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पीछे महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों के बीच हुए गठबंधन का हाथ है। जब हम सत्ता में लौटेंगे तो डांस बार पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और डांस बार मालिकों के बीच उनके पूर्व अधिकृत आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात होने के बाद शीर्ष अदालत में मुकदमे की पैरवी हल्की कर दी गई। करीब ढाई साल पहले इसी मुद्दे पर कुछ भाजपा नेताओं और बार मालिकों के बीच मुंबई के मेयर के दादर स्थित बंगले पर भी मुलाकात हुई थी। -नवाब मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी

जब बिल का ड्राफ्ट पेश किया गया था, तो सभी पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद थे। तीन बैठक आयोजित की गई, जिनमें एनसीपी नेता अजित पवार, धनंजय मुंडे भी शामिल हुए। ऐसे में एनसीपी कैसे इस तरह के भद्दे आरोप लगा सकती है, जबकि वह खुद कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा थी? -नीलम गोरहे, प्रवक्ता, शिवसेना

वेश्यावृत्ति के लिए बड़ी आड़

  • डांस बार के व्यवसाय में सबसे बड़ा हिस्सा इसकी आड़ में चलने वाली वेश्यावृत्ति का था
  • 90 से 94 हजार करोड़ रुपये तक यानी तकरीबन आधे धंधे का लेनदेन होता था वेश्यावृत्ति के जरिए
  • जिस्मफरोशी के बदले में होने वाले भुगतान के साथ बार में उड़ाए जाती थी बड़ी रकम
  • ग्राहकों की तरफ से लड़कियों के लिए खरीदे जाते थे करोड़ों रुपये के कपड़े, मेकअप का सामान व तोहफे

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