विजीलैंस ने पिछले साल 131 मामलों में 182 व्यक्तियों को रिश्वत लेते किया काबू – बीके उप्पल

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आई 1 न्यूज़ चैनल (अभिषेक धीमान) चंडीगढ़ 10 जनवरी: पंजाब के समूह सरकारी कार्यालयों से भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के मकसद से पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने रिश्वतखोरों को गिरफ़्तार करने और लोगों को इस बुराई सम्बन्धी जागरूक करने के लिए बहु-समर्थकी पहुँच अपनाई है जिसके अंतर्गत पिछले वर्ष के दौरान 131 मामलों में रिश्वत लेते हुए विभिन्न विभागों के 157 अधिकारियों और 25 प्राईवेट व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया यह जानकारी देते हुए विजीलैंस के चीफ़ डायरैक्टर-कम -ए.डी.जी.पी., बी.के. उप्पल ने बताया कि ब्यूरो ने सार्वजनिक कार्यालयों से भ्रष्टाचार के ख़ात्मे के लिए पूरी कोशिशेंं की और पंजाब को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए मुहिम चलाई जो कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा राज्य के लोगों के साथ किए वादों में से एक है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्ती से पालना करते हुए ब्यूरो ने 1 जनवरी से 30 दिसंबर, 2018 तक 17 गज़टिड अफसरों (जी ओ) और 140 ग़ैर-गज़टिड कर्मचारियों(एन जी ओ) को काबू किया गया। विजीलैंस चीफ़ ने खुलासा किया कि पिछले वर्ष के दौरान, दूसरे विभागों के अलावा पंजाब पुलिस के 49 कर्मचारी, राजस्व विभाग के 35, बिजली विभाग के 19, पंचायतों और ग्रामीण विकास के 12, स्वास्थ्य विभाग के 6, स्थानिय निकाय के 4 और खाद्य के वितरण विभाग के 4 कर्मचारी विभ्रिन्न मामलों में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। उन्होंने बताया कि डी.जी.पी. पंजाब सुरेश अरोड़ा ने ब्यूरो को भ्रष्ट पुलिस अफसरों और अधिकारियों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही करने के लिए कहा है। ब्यूरो की कारगुज़ारी संबंधी विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि विजीलैंस ने 94 कर्मचारियों के खि़लाफ़ 22 आपराधिक मामले दर्ज किये गए हैं जिनमें 22 सरकारी कर्मचारी, 41 ग़ैर गज़टिड कर्मचारी और 31 आम व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा 39 गज़टिड, 49 ग़ैर-गज़टिड और 39 प्राईवेट व्यक्तियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार सम्बन्धी शिकायतों की जांच के लिए 77 विजीलैंस जांचे भी दर्ज की गई। इसके अलावा, चार ग़ैर -गज़टिड कर्मचारियों के खि़लाफ़ आमदनी से अधिक जायदाद बनाने के केस भी दर्ज किये गए। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी नीति को लागू करने के लिए विजीलैंस अफसरों ने यह यकीनी बनाने के लिए सभी यत्न किये कि कोई भी शकी विशेष अदालतों में चलते मामलों के दौरान सज़ा से बचकर न निकल सके और जांच आधिकारियों ने समय पर सबूत पेश करते हुए दलील और सही पैरवी अदालतों में की। उप्पल ने आगे बताया कि ब्यूरो पिछले साल में 31 विजीलैंस जांचों को पूरा करने में सफल रहा और विजीलैंस मामलों में विशेष अदालतों से 36 प्रतिशत सज़ा दर की प्राप्ति की। अलग -अलग विशेष अदालतों ने भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के अंतर्गत 35 मामलों में 58 मुलजिमों को सज़ा सुनाई है, जिसमें 6 गज़टिड, 38 ग़ैर -गज़टिड और 14 प्राईवेट व्यक्ति शामिल हैं जिनको एक साल से दस साल तक कैद की सज़ा सुनाई गई। विशेष अदालतों ने 5,000 रुपए से 2 लाख रुपए के जुर्माने लगाए हैं। इन मामलों में कुल 1,56,98,000, रुपए का जुर्माना हुआ है। उप्पल ने यह भी बताया कि सरकारी मुलाजिमों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के केस दर्ज होने और उसके बाद सज़ाएं होने के कारण विजीलैंस की सिफारशों पर राज्य सरकार ने दो गज़टिड और दस गैर-गज़टिड कर्मचारियों की सेवाएं ख़त्म कर दी हैं। प्रमुख मामलों के विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग के चीफ़ इंजीनियर परमजीत सिंह घूम्मन और गुलशन कुमार कार्यकारी इंजीनियर (सिंचाई घोटाला), डीडीपीओ गुरिन्दर सिंह सराओ, तहसीलदार कुलदीप सिंह, बीडीपीओ मालविन्दर सिंह, बीडीपीओ जतिन्दर सिंह ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग (झ्यूरहेड़ी घोटाला), इंस्पेक्टर अमनदीप सिंह, सीनियर सहायक सुखप्रीत सिंह और गुरू जी उर्फ मास्टर जी को पनसप भर्ती घोटाले में गिरफ़्तार किया गया। विभिन्न विभागों में बेनियमियों को रोकने के लिए उप्पल ने कहा कि पिछले वर्ष के दौरान विजीलैंस ने राज्य में कई स्थानों पर अचानक चैकिंग की जिसमें मुख्य तौर पर प्राईवेट बसों के ग़ैर कानूनी ढंग से चलने, ऐबूलैंसों की जांच, रवी और सावन की फ़सल सीजन के दौरान अनाज मंडियों की जांच शामिल है। इसके अलावा, शैक्षिक संस्थाओं, पंचायतों, ग़ैर-सरकारी संगठनों के दफ्तरों में भ्रष्टाचार संबंधी जागरूक करने के लिए सैमीनार, रैलियाँ, रेडियो भाषण, पेंटिंग मुकाबले आयोजित किये गए। विजीलैंस जागरूकता सप्ताह के दौरान पैंफ़लेट भी बाँटे गए और ब्यूरो के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इमानदारी से सरकारी काम करने सम्बन्धी कसम दिलाई गई।, विजीलैंस प्रमुख ने जनता और ईमानदार सरकारी मुलाजिमों को राज्य में अपनी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में मदद करने के लिए कहा है और ब्यूरो को टोज फ्री हेल्पलाइन 1800 -1800 -1000 पर सूचित किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गुप्त सूचना देने वालों की जानकारी और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जायेगी।

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