दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट के पुलिस को सख्त निर्देश।

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ऑय 1 न्यूज़ चैनल

डेस्कटॉप रिपोर्ट अभिषेक धीमान,

राम कृपाल आत्म हत्या मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट के पुलिस को सख्त निर्देश डीएसपी दीपकमल को अदालत की करारी फटकार के बाद पुलिस ने दोषियों के खिलाफ पेश किया चालान लक्खा सिधाना द्वारा भी दोषियों को सजा दिलाने तक संघर्ष की चेतावनी एसएसपी को मिलकर सबूतों की बरामदगी व दोषियों की गिरफ्तारी के लिए मांग पत्र दिया मोहाली- पति राम कृपाल को आत्म हत्या के लिए मजबूर करने वाले आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पीडि़त महिला को जहां पुलिस द्वारा कोई इंसाफ नहीं मिला तो उस द्वारा पंजाब अगेंस्ट क्रप्शन के मैंबर सतनाम सिंह दांऊ के साथ मिलकर हाईकोर्ट में गुहार लगाई पर आरोपियों के ऊंचे रसूख के कारण आज करीब 2 साल गुजर जाने के उपरांत भी पीडि़त महिला की आंखे आज भी इंसाफ की राह ताक रही हैं। हालांकि एक बार इस मामले में महिला को गलत ढंग के साथ डीजीपी लैवल के एक अधिकारी की मिलीभुगत के साथ उन पर लगी 306 की धारा को खारिज करवा कर मामले में नामजद एक व्यक्ति की हाईकोर्ट को गुमराह करके जमानत तक करवा ली गई थी और दूसरी तरफ इंसाफ के लिए लड़ रही महिला व समाज सेवी सतनाम सिंह दांऊ पर उल्टा 420 का झूठा मामला दर्ज करवा दिया गया था। परंतु अब जब पीडि़त द्वारा दोबारा हाईकोर्ट को मामले की सच्चाई के बारे में बताया गया तो हाईकोर्ट ने खरड़ पुलिस को करारी फटकार लगाते हुए सारा रिकार्ड मांगा। 2 साल से दोषियों को बचाती आ रही खरड़ पुलिस ने 22 अक्टूबर को दोषियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। पीडि़त महिला ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है कि दोषियों के खिलाफ 306 की धारा को दोबारा दर्ज की जाए और सतनाम सिंह दांऊ व उस पर दर्ज किए झूठे मामले को खारिज किया जाए और मामले की मुख्य आरोपी जसविंदर कौर की जल्द गिरफ्तारी की जाए। इस संबंधी पीडि़त की पत्नी बच्चे व पंजाब अगेंस्ट क्रप्शन के मैंबर सतनाम दांऊ, एडवोकेट तेजिंदर सिंह, बिंदर सिंह व लख्खा सिधाना की टीम में राजविंदर रायेखाना व अमनदीप कौर द्वारा एसएसपी को मिलकर सबूतों की बरामदगी जिसमें रिवाल्वर, मरने वाले के हस्ताक्षर किए हुए खाली चैक व एस्टाम पेपर व दोषियों की गिरफ्तारी के लिए कुछ दिन पहले मांग पत्र भी दिया था। उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा दिलाने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा और जरुरत पडऩे पर मुख्यमंत्री द$फ्तर का घेराव भी किया जाएगा। बतानेयोग है कि राम कृपाल आत्म हत्या मामले में उसकी पत्नी खरड़ निवासी निर्मला देवी द्वारा पति को आत्म हत्या के लिए मजबूर करने के दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के लिए हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मोहाली पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी थी। इस एफआईआर में आरोपियों की निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक जमानत की याचिका मानयोग हाईकोर्ट द्वारा यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि आरोपी व उसके साथियों के खिलाफ कत्ल केस, ठगी मारने व बलात्कार के केसों में फंसाने के कई मामले चलते है और इन केसों की गंभीरता को देखते हुए इस आत्म हत्या केस में इनकी जमानतें नहीं हो सकती। परंतु दोषियों जिनमें जसविंदर कौर निवासी फतेहउल्लापुर, हरजीत सिंह सैणी माजरा व रघुबीर सिंह निवासी सैणी माजरा के डीजीपी पंजाब पुलिस के आफिस में खास रसूख होने के कारण मानयोग हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन ने दोषियों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए दर्ज एफआईआर ही कैंसिल करके एक आरोपी की हाईकोर्ट में जमानत लेने में सीधी मदद कर दी। जिसका पता लगने पर पीडि़त द्वारा फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया जिस पर हाईकोर्ट ने तुरंत प्रभाव के साथ स्टे जारी कर दी और सरकारी वकील को कैंसलेशन रिपोर्ट बनाने वाले पुलिस अधिकारियों के बारे में पूछा तो वह कोई स्पष्ट जानकारी कोर्ट को ना दे सके तो केस के जांच अधिकारी ने अदालत को जानकारी दी कि यह केस एक सिट बनाकर डीएसपी खरड़ की निगरानी में दर्ज हुआ था जिस कारण अदालत ने डीएसपी खरड़ दीप कमल को पेश होने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद डीएसपी खरड़ को दोबारा हिदायतें दी गई कि इस केस की सही जांच करके अगली तारीख पर केस के साथ संबंधित हर तरह का रिकॉर्ड लेकर अदालत में पेश हों। इस केस को रोकने के लिए शिकायतकर्ता महिला, उसके बेटे को 420 के केस में फंसाया गया था और दांऊ का नाम भी पुलिस ने इस केस में शामिल कर लिया था ताकि वह दोषियों के खिलाफ पीडि़तों की मदद ना कर सके। अब फिर हाईकोर्ट की सख्ती ही काम आई। पंजाब पुलिस में एसे आफिसरों की कमी नहीं जो चंद पैसों वालों के हाथ की कठपुतली बने बैठे हैं।

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