जीरकपुर के लोगो को भी मिलेगा पाल ढाबा का मजा बुधवार को की तीसरे ढाबे की शुरवात |

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आई 1 न्यूज़ 19 अप्रैल 2018 लाइव म्यूजिक, ओपन एरिया फील और गार्डन विद फाउंटेन के साथ पाल ढाबा के तीसरे ढाबे का हुआ उद्धघाटन  द हट लांच फॅमिली रेस्टुरेंट बाये पाल ढाबा के नाम से जीरकपुर में ओपन हुई तीसरी ब्रांच सन 1960 से अब तक वही टेस्ट के साथ पाल ढाबे की एक और ब्रांच अब जीरकपुर में अक्षय तिथि के शुभ अवसर पर पाल ढाबा (द हट लांच फॅमिली रेस्टुरेंट बाये पाल ढाबा) ने अपने तीसरे ढाबे का उद्धघाटन जीरकपुर हाईवे रोड पर किया. सन 1960 से अपने खाने के स्वाद को बनाये रखे इस ढाबे ने पिछले 58 साल से ट्राई सिटी ही नहीं बॉलीवुड  , पॉलीवूड और टॉलीवूड के सभी नामी एक्टर और एक्ट्रेस को अपने खाने का स्वाद चखाया है. तो चाहे वो बटर चिकन हो, मट्टन व् कीमा हो या स्पेशल दाल मखनी हो. चंडीगढ़ में आया हुआ कोई भी सेलिब्रिटी पाल ढाबा का खाना खाये बिना खाली नही गया है. आज इसी स्वाद को बनाये पाल ढाबे के करता धर्ता महिंदर सिंह ने लाइव म्यूजिक, ओपन एरिया फील और गार्डन विद फाउंटेन के साथ पाल ढाबा के तीसरे ढाबे का हुआ उद्धघाटन किया. उन्होंने बताया की चंडीगढ़ पाल ढाबा सेक्टर 28 , पंचकूला सेक्टर 20 के बाद अब जीरकपुर में वे पाल ढाबा की तीसरी ब्रांच ओपन करने जा रहे है. जिसका कारण लोगो में बढ़ती पाल ढाबे की हाईवे पर डिमांड है. उन्होंने बताया की लोगो की डिमांड पर इस बार वे अपने ढाबे पर लाइव म्यूजिक, ओपन एरिया फील और गार्डन विद फाउंटेन एक डिफरेंट कांसेप्ट लेकर आये हैजहा लोगो को फार्म हाउस वाली फीलिंग आएगी. उन्होंने साथ ही बताया की पाल ढाबे की स्पेशलिटी उनके खुद के बनाये मसाले है.
कैसे हुई शुरुआत 
स्वर्गीय अशोक कुमार जी द्वारा सन 1960 में 22 सेक्टर की शास्त्री मार्किट में रेहड़ी लगा कर खाना खिलाने की शुरुआत की गयी. क्योकि लोगो को अशोक कुमार जी की फ़ूड रेसेपी इतनी पसंद आयी की उनका बनाया चिकन या मटन हाथो हाथ बिक जाता था. इसलिए उन्होंने अपना पहला सेटअप सेक्टर 28 में पाल ढाबा के नाम से सन 1971 में किया. स्वर्गीय अशोक कुमार जी के बेटे महिंदर सिंह ने 10 साल की उम्र से ही खाने की रेसिपी सीखनी शुरू कर दी और आज महिंदर सिंह 66 साल के हो चले है लेकिन उनके पाल ढाबे के खाने का स्वाद अब भी वैसा ही है जो उनके पिता जी बनाया करते थे.
पाल ढाबे के कुक को मिलती है स्पेशल ट्रेनिंग:
महिंदर सिंह ने बताया कि अब हमारी तीसरी ब्रांच खुलने जा रही है और आज तक हमने अपने ढाबे को कभी पगड़ी ( लीज) पर नही दिया। क्योंकि हमारे खाने के स्वाद का मैच किसी और ढाबे पर आ ही नही सकता। इसलिए मैं अपने ढाबे के कुक को खुद ट्रेनिंग देता हूं। ताकि 58 साल वाला वही स्वाद हर रेस्टुरेंट में बना रहे।
हमारी खासियत:
अगर नॉन वेज की बात करे तो पाल ढाबे की स्पेशलिटी बटर चिकन, मट्टन, किममा, रोगन जोश है। वही वेज फ़ूड में दाल मखनी, शाही पनीर और पनीर बटर मसाला खासियत है। वही विंटर सीजन में साग और मक्की की रोटी खासियत है। इतना ही नही यहाँ पर स्पेशल गुड़ के लडडू तैयार किये जाते है जो हर सुबह हाथो हाथो बिक जाते है।
अब मेरा बेटा गुरमीत सिंह पाल ढाबे की प्रथा को निभाएगा:
महिंदर सिंह के बेटे गुरमीत सिंह अब पाल ढाबे को अलग लेवल पर पहुचायेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान गुरमीत सिंह ने बताया कि आज यूथ की डिमांड है, लाइव म्यूजिक और स्नैक्स में ज्यादा से ज्यादा वैरायटी होना। ऐसे में ये उन्ही का आईडिया था कि इस ढाबे का नाम थोड़ा युथ ओरिएंटेड हो और लाइव म्यूजिक कांसेप्ट भी खोल जाए।

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