ISIS द्वारा मारे गए हिमाचलियों की खबर सुनते ही देवभूमि में मातम छा गया है।

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आई 1 न्यूज़ 20 मार्च 2018 शिमला: इराक के मोसुल में ISIS द्वारा मारे गए हिमाचलियों की खबर सुनते ही देवभूमि में मातम छा गया है। मारे गए 39 भारतीयों में से चार हिमाचल प्रदेश से थे। ये चारों हिमाचल के कांगड़ा (3) और मंडी (1) जिले से संबंध रखते थे। युवक संदीप कुमार फतेहपुर धमेटा से था। इंद्रजीत कुमार कांगड़ा के शाहपुर के लंज का रहने वाले था। अमन धर्मशाला के पासो गांव का रहने वाला था। वहीं हेमराज मंडी के सुंदरनगर का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि 2013 में ये चारों रोजगार की तलाश में इराक गए थे। जहां से अब इनकी मौत की खबर आ रही है। बता दें कि संसंद में मंगलवार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इनकी मौत की पुष्टि की है।

मंडी

मंडी जिला के सुंदरनगर उपमंडल के बायला गांव का हेमराज पिछले 4 सालों से इराक में लापता है। 31 जुलाई 2013 को हेमराज इराक गया था और वहां पर कुक का काम करता था। हेमराज के साथ 40 भारतीयों का दल था। जब इराक में युद्ध जारी हुआ तो उस समय 14 जून 2014 को हेमराज सहित 39 अन्य भारतीय लापता हो गए। हेमराज की पत्नी निर्मला देवी के अनुसार 14 जून को उनके पति का आखिरी फोन आया था जिसमें उन्होंने बताया कि बम ब्लाकस्ट के कारण उसकी टांग पर चोट लगी है और उन्हें बंधक बना लिया गया है। इसके बाद न तो कोई फोन आया और न ही आज दिन तक हेमराज का पता चल पाया। यह सारी बातें लापता हेमराज की पत्नी निर्मला देवी ने पंजाब केसरी को 8 सिंतबर 2016 को बताई थी। उस वक्त पंजाब केसरी ने हेमराज की गुमशुदगी के मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाया था।

यह मामला भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के ध्यान में था और आज जब सदन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 39 शवों के मिलने की बात कही तो पूरे देश में हडकंप मच गया। हालांकि अभी तक मंडी जिला प्रशासन या फिर लापता हेमराज के परिवार को कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हेमराज के दो बच्चे हैं जिसमें एक बेटा और एक बेटी है। दोनों अभी छोटे हैं और इनकी परवरिश का सारा जिम्मा निर्मला देवी पर है। अब जब वहां पर शव मिलने की जानकारी आई है तो इससे परिवार की बेचैनी और भी बढ़ गई है। क्योंकि परिवार को इधर-उधर से ही सूचनाएं मिल रही हैं जबकि अधिकारिक तौर पर कोई सूचना प्राप्त नहीं हो सकी है।

फतेहपुर

फतेहपुर के धमेटा के संदीप का डीएनए मैच हो गया है। संदीप के मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया। जाहिर है कि रोजी-रोटी की तलाश में 16 सितंबर 2013 को संदीप इराक गया था। वह मोसूल शहर में टीएनएच कंपनी में कार्यरत था। 15 जून 2014 को आतंकियों ने उन्हें अन्य 38 भारतीयों के साथ बंधक बना लिया। उसी दिन उन्होंने परिजनों को भी दूरभाष पर सूचित किया था और उसके बाद से संदीप का कोई पता नहीं लग पाया है। उसके घर पर पत्नी चंद्रेश के अलावा बुजुर्ग माता-पिता व आठ साल का बेटा व 11 साल की बेटी की भी है। वह अपने घर का इकलौता सहारा था।

कांगड़ा के शाहपुर के लंज के रहने वाले इंद्रजीत कुमार के परिजनों का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। इंतजार की लंबी घड़ियों के बाद खत्म हुआ इंतजार गुजरे पांच सालों में उठाई गई पीड़ा से कहीं अधिक था। जैसे ही उनके परिजनों को पता चला कि इराक में एक पहाड़ी से मिले शवों में से एक शव उनके बेटे का है तो उन पर जैसे पहाड़ सा टूट गया। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। बता दें कि आज ही केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि इराक के मोसूल में बंधक बनाए 39 भारतीयों की मौत हो चुकी है और टीएनए के बाद उनके शवों की पहचान कर ली गई। मारे जाने वालों में एक लंज के भटेड का इंद्रजीत भी है, जो कि भविष्य को संवारने इराक गया हुआ था।

इंद्रजीत के परिजनों को उसके लौटने का लंबा इंतजार तो खत्म हो गया। अब उन्हें अपने लाडले के शव के पहुंचने का इंतजार है। शव लाने के लिए जनरल वीके सिंह बगदाद जाएंगे और जहाज से शवों को लाएंगे। इंद्रजीत का शव पंजाब के 31 लोगों व हिमाचल के अन्य तीन शवों के साथ अमृतसर में जहाज से उतारा जाएगा। 2014 को इराक के मोसूल में आतंकियों के चंगुल में फंसे 39 भारतीयों की मौत की खबर आने के बाद लंज क्षेत्र में दुख की लहर दौड़ पड़ी। उन्होंने बताया कि हम जब भी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने जाते थे तो पंजाव से अपहरण किए गए लड़कों के परिवार वाले भी हमारे साथ ही होते थे। वह हमें बताते थे कि पंजाब सरकार की तरफ से उन्हें हर महीने 30 हजार रुपए की धनराशी मुहैया करवाई जाती थी।

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