कुलदीप दीपक ने कला भवन में जगाई साहित्यक गीतों की लौ क संगीत |

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आई 1 न्यूज़ चंडीगढ़, 6 मार्च: कुलदीप दीपक ने कला भवन में जगाई साहित्यक गीतों की लौ क संगीत शब्दों को पंख लगा देता है: सुरजीत पातर पंजाब कला परिषद् की ओर से बीती शाम कला भवन में ट्रांटो में बसे पंजाबी गायक और ब्रॉडकास्टर कुलदीप दीपक के साहित्यक गीतों की साहित्यक शाम करवाई गई। कुलदीप दीपक ने पंजाबी के चोटी के कवियों के गीत गाकर कला भवन का प्रांगण साहित्यक गीतों की लौ के साथ रौशन कर दिया। कुलदीप दीपक ने गिटार की मधुर और दिलकश धुनों से गीतों की प्रस्तुति दी और गौतम धर ने तबले पर साथ दिया। दीपक ने शिव कुमार बटालवी का ‘शिकरा यार’, ‘कौण मेरे शहर आ के मुड़ गया’, अमृता प्रीतम का ‘आईयां सी यादां तेरियां’, सोहण सिंह मीशा का ‘अध्धी रात पैहर देतडक़े’ गाकर रंग बांधा। शाम का शिखर उस समय हुआ जब दीपक ने इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और पंजाब कला परिषद् के चेयरमैन डा.सुरजीत पातर की उपस्थिति में उनकी गज़लें ‘इस तरां है दिन रात विच विचला फासला’, ‘की ख़बर सी तैनूें एह जग भुल्ल जाऐगा’ गाईं। दीपक ने माहीया-टप्पे नये रूप में पेश किया। इस अवसर पर डा. सुरजीत पातर ने दीपक को परिषद् द्वारा सम्मानित किया। डॉ. पातर ने दीपक के गीतों के चुनाव की सराहना करते हुये कहा कि संगीत शब्दों को पंख लगा देता है और आज की महफि़ल में दीपक ने अमृता प्रीतम, मीशा और शिव की यादों को ताज़ा कर दिया है। प्रोग्राम का मंच संचालन भुपिंदर मलिक ने किया। इस अवसर पर पंजाब ललित कला अकादमी के प्रधान दीवाना माना, डॉ. दीपक मनमोहन सिंह, निंदर घुगियाणवी, दीपक शर्मा चनारथल और सबदीश आदि उपस्थित थे।

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