हिमाचल में सौर ऊर्जा से होगी खेतों की सिंचाई जयराम सरकार का बड़ा फैसला,

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ब्यूरो रिपोर्ट :17फरवरी 2018
हिमाचल प्रदेश में ठप पड़ी सिंचाई योजनाओं को सोलर पंपों से चालू करने की योजना है। कृषि मंत्री रामलाल मारकं डा ने विभाग से बंद पड़ी ऐसी तमाम स्कीमों का ब्योरा तलब किया है। ऐसी सभी स्कीमों को दोबारा चालू किया जाएगा। बंद पड़ी कूहलों का भी ब्योरा मांगा गया है। इन कूहलों को भी दोबारा शुरू किया जाएगा।  वीरवार को राज्य सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने जानकारी कहा, प्रदेश में कृषि विभाग की मदद से किसानों के लिए बड़ी संख्या में सामुदायिक योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से कई योजनाएं बंद पड़ीं हैं। इसके कई कारण हैं। 

एक कारण बिजली से चलने वाले पंपों का खराब होना है, जबकि एक अन्य वजह वक्त पर बिजली के बिलों का भुगतान न होना है। किसान विकास संघों के माध्यम से उक्त योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसी तमाम योजनाओं का कृषि विभाग के अधिकारियों से ब्योरा मांगा गया है।

इसी तरह से ठप पड़ी कूहलों का भी अफसरों से विवरण मांगा गया है। प्रदेश में पिछले कई वर्षों में खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए कूहलें बनाई गई थीं। इनमें से अधिकतर कूहलें क्षतिग्रस्त होने या फिर जलस्रोतों में पानी की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। मंत्री मारकंडा ने कहा कि सरकार के 100 दिन के लक्ष्य के तहत इसके बारे में पूरा मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।  

शिमला के नजदीक जुब्बड़हट्टी के कहलोग मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस गांव में पानी सौर ऊर्जा से करीब 220 मीटर ऊपर उठाया गया है और इस पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही है। मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि ऐसी योजनाएं पूरे प्रदेश में लागू की जाएंगी।

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