पी.जी.आई. की एमरजैंसी में जबरदस्ती पोस्टमार्टम के खेल का अब पर्दाफाश

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 पी.जी.आई. की एमरजैंसी में जबरदस्ती पोस्टमार्टम के खेल का अब पर्दाफाश होने की उम्मीद है। एमरजैंसी में मरीजों के परिजनों को धमकाकर जबरन पोस्टमार्टम की कार्रवाई करने वाले डा. आशीष भल्ला को एमरजैंसी इंचार्ज के पद से हटा दिया गया है।

यह कोई अकेला मामला नहीं था, जिसमें एमरजैंसी इंचार्ज पर आरोप लगे थे अन्य कई मामलों में भी उन पर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार करने और धमकाने के आरोप लगते रहे। नयागांव निवासी शंकर जिनके 59 वर्षीय पिता बिशन सिंह का उनके द्वारा मना करने के बावजूद भी पोस्टमार्टम किया गया था अभी भी इतनी हल्की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि डाक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पी.जी.आई. की एमरजैंसी में कुछ समय पूर्व कई मरीजों की मौत होने के बाद जबरदस्ती पोस्टमार्टम किए जाने का खुलासा हुआ था। एमरजैंसी के इंचार्ज रहे डा. आशीष भल्ला पर मरीजों के परिजनों को धमकाने और एम.एल.सी. केस न होने के बावजूद भी जबरन पोस्टमार्टम करने के आरोप लगे थे। इसकी शिकायत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और प्राइम मिनिस्टर ऑफिस तक भी पहुंची थी।

पी.एम.ओ. ने इस पर कार्रवाई करते हुए पी.जी.आई. से जवाब मांगा था। शिकायतकर्ता शंकर को करीब हफ्ता भर पहले पी.एम.ओ. की तरफ से पत्र डाला गया और फोन कर इस संदर्भ में पूछा गया लेकिन शंकर ने कहा कि डाक्टर आशीष भल्ला के खिलाफ तो अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसके बाद पी.एम.ओ. से सख्त रवैया अपनाया गया और संस्थान के आला अधिकारियों को डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लिखा। इसके बाद पी.जी.आई. प्रशासन ने डा. आशीष भल्ला को एमरजैंसी इंचार्ज के पद से हटा दिया।

गले के कैंसर के मरीज का कर दिया था जबरन पोस्टमार्टम :
नयागांव के शंकर के पिता बिशन सिंह (59) का करीब बीते दो साल से पी.जी.आई. में इलाज चल रहा था। उन्हें गले का कैंसर था। 1 जून, 2017 को उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें पी.जी.आई. की एमरजैंसी में लाया गया। यहां पर जूनियर डाक्टर ने उन्हें ब्रॉट डैड घोषित कर दिया।

शंकर पिता के शव को घर ले जाने की तैयारी करने लगे तो मौके पर एमरजैंसी के इंचार्ज डा. आशीष भल्ला पहुंच गए। उन्होंने जूनियर डाक्टर व परिजनों को कहा कि शव का पहले पोस्टमार्टम होगा तभी परिजन बॉडी ले जा सकते हैं। शंकर ने मना किया कि उन्हें पोस्टमार्टम नहीं करवाना तो डा. आशीष भल्ला ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि हम पुलिस को केस दे देते हैं। वह एफ.आई.आर. दर्ज कर लेंगे और इसके बाद हम पोस्टमार्टम कर देंगे।

सूत्रों के अनुसार संस्थान के इंक्वायरी करने पर इसी तरह के कुछ और केस सामने आए। शंकर ने बाद में इसकी शिकायत पी.जी.आई. प्रशासन से की। शंकर ने पी.एम.ओ. और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी शिकायत भेजी। पी.एम.ओ. ने पी.जी.आई. से इस बाबत जवाब मांगा जिस पर संस्थान की पब्लिक रिलेशन ऑफिसर मंजू वडवालकर ने लिखित जवाब भी भेजा जिसकी कापी शिकायतकर्ता शंकर को भी भेजी गई।

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