खेतों में पहुंचेगा सिंचाई का पानी मोबाइल फोन का एक बटन क्लिक करते ही

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ब्यूरो रिपोर्ट :5 फरवरी 2018
अब मोबाइल फोन का एक बटन क्लिक करते ही सिंचाई का पानी स्कीम से सीधे आपके खेत तक पहुंच जाएगा। धूप से सिंचाई के लिए पानी भी लिफ्ट हो रहा है और घरेलू इस्तेमाल को बिजली भी बनेगी।

खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को अब पंपों के पास बैठने की जरूरत भी नहीं होगी। वे घर बैठे ही जब चाहें पंप को ऑन या ऑफ कर सकेंगे। यह सोलर पैनलों से जुड़ी मोबाइल ऐप से संभव होगा। कम लागत वाली ऐसी योजनाओं से राज्य सरकार के बजट और बिजली दोनों की ही बचत होगी।

शिमला के जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट के पास कहलोग गांव में सोलर एनर्जी से 220 मीटर ऊंचाई तक राज्य कृषि विभाग ने एक सफल प्रयोग किया है। अब कृषि महकमा हिमाचल के कृषि योग्य तमाम ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कहलोग मॉडल को अपनाएगा।

एक क्लिक से 220 मीटर ऊपर लिफ्ट होना शुरू हो जाता पानी

प्रतीकात्मक तस्वीर
राजधानी शिमला के मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट के पास ग्राम पंचायत चनोग के कहलोग गांव में मोबाइल फोन का एक बटन क्लिक करते ही सिंचाई का पानी 220 मीटर ऊपर लिफ्ट होना शुरू हो जाता है।

सोलर पैनल के साथ ही एक चिप जोड़ी गई है, जिसका संबंध शक्ति मोबाइल ऐप से है। इसी चिप से मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित शक्ति पंप से भी इस सोलर स्कीम की निगरानी की जाती है।

अगर खुद सोलर पंप को ऑन न कर पाएं तो ये मध्य प्रदेश के शक्ति पंप पर टोल फ्री नंबर पर सूचना देने के बाद भी ऑन हो जाता है। इस योजना के लिए शक्ति पंप के साथ ही हिमाचल के कृषि महकमे का समझौता हुआ है।

कहलोग में महज इतने पैसों से बनी सामुदायिक सिंचाई योजना

कहलोग में सामुदायिक सिंचाई योजना महज 13.73 लाख रुपये की लागत से बनी है और इसका 100 फीसदी खर्च कृषि महकमे ने ही उठाया है। सामान्य योजना में इससे चार-पांच गुणा तक खर्च आ सकता है। कहलोग में 30 सोलर पैनल लगे हैं।

इनसे 7500 वाट बिजली पैदा होती है जो 220 मीटर ऊपर तक पानी खींच रही है। जहां नीचे जाबल का खेत जगह से पानी लिफ्ट हो रहा है, वहां पानी भी बहुत कम है। इसे पहले दो छोटे-छोटे स्रोतों से एकत्र कर एक टैंक में स्टोर किया जा रहा है।

इस निचले टैंक से पानी 220 मीटर ऊपर दूसरे टैंक में जा रहा है। वहां से नीचे गांव में करीब चार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को छह चैंबर बनाए गए हैं। इनसे कहां पानी छोड़ना है कहां नहीं, इसका भी चैंबरों में ही नियंत्रण है।

सोलर पैनल से दोहरा काम होगा। एक सिंचाई को पानी लिफ्ट होगा तो दूसरा गांव के लिए बिजली भी पैदा होगी। बिजली पैदा करने के लिए अलग से बैटरी लगवाई जा रही है।

उजाड़ हो गई गांव की खेतीबाड़ी, अब नकदी फसलें उगाने की तैयारी

कृषि उपनिदेशक शिमला डॉ. चंद्रप्रकाश वर्मा ने बताया कि इस योजना को उप मंडलीय भू संरक्षण अधिकारी देवी चंद कश्यप, डिविजनल इंजीनियर अश्वनी कुमार भारद्वाज, भू संरक्षण मंडल शिमला के अनुभाग अधिकारी हेमराज गांधी आदि की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।

वे खुद और कृषि विभाग के निदेशक डॉ. देसराज वर्मा भी इस योजना का विजिट कर चुके हैं।कहलोग गांव के श्रीराम चंद, जगदीश चंद और खेम चंद बताते हैं कि उनके गांव में परंपरागत फसलें ही होती हैं।

इनसे अच्छी आमदनी नहीं हो पाती थी, जिससे खेतीबाड़ी लगभग उजाड़ है। अब वे नकदी फसलें उगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कृषि महकमे का इस योजना के लिए धन्यवाद किया है।

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