सेब को विशेष श्रेणी उत्पाद घोषित करने की मांग : वीरेंद्र कश्यप

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आई 1 न्यूज़ : ब्यूरो रिपोर्ट

पिछले पांच साल में सेब का विदेशों से आयात 1,22,265 से बढ़कर 3,00,000 मीट्रिक टन बढ़ने के कारण लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ रहा है। इससे बाजार में सेब के दाम गिरने से हिमाचल के सेब बागवानों को नुकसान हो रहा है। वीरेंद्र कश्यप ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि सेब करीब 1.60 लाख परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है।

विदेशों से भारत के लिए सेब का आयात बढ़ गया है। पिछले पांच साल में ये आयात 1,22,265 से बढ़कर 3,00,000 मीट्रिक टन हो गया है। ये सेब आयात अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और चीन से बढ़ा है। इससे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

इस वजह से उन्हें मार्केट में अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे हैं।सांसद वीरेंद्र कश्यप ने ये मामला संसद में उठाया और सेब को विशेष श्रेणी का उत्पाद घोषित करने की मांग की। सांसद कश्यप ने बताया कि उन्होंने लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु से सेब पर आयात शुल्क को विश्व बैंक बाउंड एरिया की दर 50 फीसदी से बढ़ाने की मांग उठाई है।

इसके लिए सेब को विशेष श्रेणी उत्पाद घोषित करने की मांग की, जिससे कि पहाड़ी राज्यों के सेब उत्पादकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि इससे उनकी आजीविका पर बुरा असर पड़ रहा है।

 

ये प्रदेश के 12 जिलों में से नौ में उत्पादित किया जा रहा है।सेब दुर्गम इलाकों में अकेली नकदी फसल है। देश में 2.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सेब होता है। इसकी कुल पैदावार 29 लाख मीट्रिक टन होती है। ये प्रमुख रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में ही होता है।

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