हिमाचल को जेटली के बजट से ऊर्जा कनेक्टिविटी और उद्योग क्षेत्र में आस

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प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्रीय बजट से हिमाचल को खासी उम्मीदें हैं। जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश को होने वाले नुकसान की भरपाई से लेकर राज्य केंद्र में निहित कई तरह की शक्तियों में विशेष राहत चाहता है। प्रदेश की 50 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए अनिवार्य वन एवं पर्यावरण की अनापत्ति से छूट चाहिए।

राज्य बिजली की बिक्री से होने वाली आय में सर्विस टैक्स से छूट भी चाहती है। विकास योजनाओं के आड़े आ रहे वन भूमि से संबंधित नियमों में कुछ रियायत की मांग केंद्र से की है। अभी तक सरकार केवल 1 हेक्टेयर तक की अनुमति खुद दे सकती है, जिसे 10 हेक्टेयर किए जाने का सुझाव केंद्रीय वित्त मंत्रालय को दिया है।

सरकार ने प्रदेश में ढांचागत विकास के लिए बड़े एयरपोर्ट, नई रेललाइनों, हेली टैक्सी चलाने में मदद के साथ उद्योगों के लिए 100 प्रतिशत कर में छूट देने का प्रस्ताव भी दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के वर्ष 2018-19 के बजट को लेकर राज्य सरकार ने 18 बिंदुओं पर मांग रखी है।

मोदी सरकार से हिमाचल को यह मिला

राज्य सरकार अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए वन पर्यावरण के विकास योजनाओं पर पड़ने वाली कानूनी पेचीदगी का सरलीकरण चाहती है। इतना ही नहीं, जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर भी राज्य सरकार केंद्र से विशेष रियायत चाहती है।

जीएसटी लागू होने से प्रभावी होने के बाद पहले से चल रहे औद्योगिक पैकेज के तहत जिन उपक्रमों को 2020 तक इनकम और केंद्रीय आबकारी शुल्क की छूट दी गई है, उनके लिए विशेष आर्थिक मदद मांगी गई है। इसी तरह से सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के अलावा छोटे उद्योगों के लिए विशेष मदद की उम्मीद है।

हिमाचल को केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2014 में आईआईएम का तोहफा मिला। इसी साल रेणुका बांध पर काम के लिए बजट जारी हुआ। लाहौल-स्पीति में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की योजना धरातल पर नहीं उतरी।

वर्ष 2015 में जेटली ने प्रदेश को एम्स देने की घोषणा की, जिसके लिए दिसंबर 2017 को 1351 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। वर्ष 2016 के बजट में हिमाचल के लिए राष्ट्रीय रेल परियोजना मिली, लेकिन अभी उसका सर्वे होना है। इसके अलावा हमीरपुर ऊना रेललाइन पर स्वीकृति मिली। पिछले बजट में हिमाचल के हिस्से कोई बड़ी घोषणा नहीं आई।

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