इस सूखे से किसानों कोअपनी फसलों के सूखने से हानि उठानी पड़ रही है

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ब्यूरो रिपोर्ट :21 जनवरी 2018

राजगढ़: बादल आने और नाम-मात्र बरसने के बाद चले जाने से किसान-बागवान काफी सहमें हुए हैं उन्हें डर है कि यह सर्दी भी बिना बर्फ एवं वर्षा के न बीत जाए। अभी तक वर्षा न होने से सूखे के साथ साथ पूरा क्षेत्र, शीतलहर की चपेट में आ गया है। किसान लोग अपने जरूरी कार्य सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था से पूरा करने में लगेहुए हैं।

ग्रामीणों को इस सूखे का आभास बहुत पहले हो चुका था। मौसम संबंधी ग्रामीण धारणा के अनुसार जब जब कार्तिक महीने में वर्षा होती है तो तीन महीने तक दोबारा वर्षा नहीं होती यानि अब माघ में वर्षा होने की संभावना है और देखना है कि अब बारिश कब होगी। धारणा के अनुसार अभी तक वर्षा नहीं हुई है तथा और इंतजार करना पड़ सकता है। विश्व विद्यालय नौणी के मौसम विभाग की पूर्व वैज्ञानिक परमिंदर कौर बवेजा ने भी मौसम संबंधी ग्रामीण धारणाओं को कुछ हद तक सही माना है।

इस सूखे से किसानों कोअपनी फसलों के सूखने से हानि उठानी पड़ रही है जिसमें सबसे अधिक लहसुन की फसल प्रभावित हुई है। इसके अलावा मटर, गेहूं- जौ इत्यादि भी सूखे की चपेट में आ गये हैं। हालांकि इस सूखे ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी है परंतुं बागवानों को जरूर लाभ मिल रहा है। उन्हें पौधों में प्रुनिंग करने का समय मिल गया है। ज्ञात रहे बागवानों को फलों में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सेब, आड़ू, प्लम, खुबानी, नेक्टरीन, नाशपाती, बादाम इत्यादि की टहनियों की काट छांट तथा हर टहनी को हेड-बैक करना पड़ता है जिससे फल कम तथा आकार बड़ा हो जाता है। यही उचित समय है 

जब बागवान अपने पौधों पर टीएसओ यानि ट्री-स्पे-आयल का छिड़काव करते हैं। इससे पौधे में आए क्रेक्स एवं पौधे की चमड़ी पर तेल की एक परत चढ़ जाती है। इसी के साथ पौधों के तनों पर चूना, अलसी का तेल एवं नीला थोथा का घोल बना कर लिपाई की जाती है। इनके चलते न तो तना छेदक कीड़े तने में छेद कर सकते हैं और न ही तेल की परत के कारण उस पर चढ़ सकते हैं। इन्हीं परतों के कारण आगामी समय में पड़ने वाली ठंड से भी पौधे अपना बचाव करते हैं।

छिड़काव के अतिरिक्त बागीचे की झाड़ियां काटना तथा तौलियों के लिए गोबर ढोना एवं फैलाना सूखे मौसम में ही किया जा सकता है। यदि अब माघ महीने में भी वर्षा नहीं होती है तो किसानों बागवानों के लिए अवश्य परेशानी खड़ी हो जाएगी। सिंचाई के माध्यम से जिन किसानों ने फसलें बोई हैं उन्हे इस महीने वर्षा की दरकार रहती है। अभी तक क्षेत्र में नाम मात्र वर्षा हुई है। चूड़धार तक सीमित बर्फ एवं निचले क्षेत्र में बूंदा-बांदी के चलते ‘‘सूखी बर्फ’’ यानि पाले ने अवश्य सफेद चादर ओढ़नी आरंभ कर दी है जिससे क्षेत्र शाीत लहर की चपेट में आ गया है।

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