ओरेंज फेस्टीवल नागपुर में सिरमौरी संस्कृति का शानदार प्रदर्षन

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ब्यूरो रिपोर्ट :20 जनवरी 2018

राजगढ

20 जनवरी आसरा संस्था के प्रभारी गोपाल सिंह ने जारी बयान में कहा कि संस्कृति मंत्रालय के दक्षिण मध्य क्षेत्रिय सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर द्वारा आयोजित किए जा रहे ओरंेज सिटी क्राफ्ट मेला नागपुर के लोक नृत्य सामारोह में आसरा संस्था, जालग के पंन्द्रह कलाकारों ने इस बहुरंगी कलाओं के उत्सव में भाग लेकर सिरमौर जिला के पारम्परिक लोक नृत्यों की झलक पेष की। नागपुर में पिछले पच्चीस वर्षों से हर वर्ष इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक मेले का आयोजन किया जाता रहा है जिसमें देष भर के विभिन्न राज्यों की संस्कृतिक झलक देखने को मिलती है।

सत्रह से बीस जनवरी तक सोलह राज्यों से आए लगभग तीन सौ लोक कलाकारों के साथ सिरमौर के आसरा संस्था के लोक कलाकारों ने प्रदेष की अमुल्य धरोहर वर्ष भर में मौसम के अनुसार गाए जाने वाले लोक गीतों व नृत्यों की पारम्परिक विधाओं की प्रस्तुति देकर इस सांस्कृतिक समारोह में जिला सिरमौर की संस्कृति की अलग पहचान बनाई। चार दिनों में सिरमौरी कलाकारों ने अपने हुनर से जिला व प्रदेष की संस्कृति को पहचान दिलाई है।

इस सास्कृतिक आयोजन में मध्य प्रदेष का भगौरिया नृत्य, छत्तीसगढ़ का ककसार, कर्नाटक का ढोलु कुणीता, जम्मु कष्मीर का रूफ, ओडिसा का गुबकुडू व सांढा नृत्य, उत्तर प्रदेष का मयुर, त्रिपुरा का हौजागीरी, आन्ध्र प्रदेष का थपेटा गुल्लू, गुजरात का सिद्दी धमाल, हरियाणा का घुमर, फाग व बीन जोगी, मेघालय का वांगला, पंजाब का भांगड़ा, जीन्दूआ व बाजीगर, लेह लद्ाख का जेब्रो, मध्य प्रदेष का राई, राज्य स्थान का कच्ची घोड़ी, भपंग व तेराताली नृत्य के साथ हिमाचली कलाकारों को इस सांस्कृतिक महोत्सव में प्रदर्षन के लिए आमंत्रित किया गया था।

विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले लोक नृत्य की प्रस्तुति हेतु तैयार किए गए मंच में ग्रामीण परिवेष की झलक दिखाई देती थी। यूं लगता था जैसे मंचीय प्रस्तुतियां किसी मेले में नहीं बल्कि महाराष्ट्र के किसी गांव में हो रही हैं। सम्पूर्ण क्राफ्ट मेला परिसर की बनावट भी गांव के परिवेष में की गई। जिसमें महाराष्ट्र की पारम्परिक शैली के मकान, वास्तु कला, पूजा स्थलियों व ग्रामीण जन जीवन की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

सांस्कृतिक संध्याओं में सिरमौर के लोक कलाकारों ने सिरमौरी नाटी की प्रस्तुति में ठोडा, रिहाल्टी गी, दीपक नृत्य, परात नृत्य, मुंजरा नृत्य, हुडक नृत्य व रासा नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां दी। विद्यानन्द सरैक द्वारा लिखित लोकगीतों तथा जोगेन्द्र हाब्बी के निर्देषन में तैयार लोक नृत्यों की प्रस्तुति ने नागपुर के हजारों दर्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा दर्षकों के आग्रह पर कई बार सिरमौरी नाटी व नम्बरदार स्वांग के पुनः प्रदर्षन किए गए।

इस लोक नृत्य महोत्सव में दर्षकों की भीड़ में नागपुर की कई नामी हस्तियां इस बहुरंगी संस्कृति का आनंन्द ले रही थी। आसरा साॅस्कृतिक दल के कलाकारों में लोक गायक रामलाल वर्मा, गोपाल हाब्बी व सुनपति, ढोलक वादक हंसराज व रमेष कुमार, रणसींगा व करनाल वादक मुकेष कुमार, बांसुरी वादक कृष्ण लाल, लोक नर्तक चमन लाल, जोगेन्द्र, अमीचन्द, जितेन्द्र, सरोज, लीला, अनुजा तथा लक्ष्मी ने इस महोत्सव में हिमाचल प्रदेष के जिला सिरमौर की पारम्परिक नृत्य विधाओं की प्रस्तुति देकर दर्षकों का भरपूर मनोरंजन किया।

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