पिछले साल के ये कलाकार जिनके बिना अधूरी थी ये अच्छी फिल्में

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किसी भी फ़िल्म में कहानी एक मुख्य पात्र के इर्द-गिर्द घूमती है। ये नायक या नायिका हो सकती है, मगर नायक-नायिका की कहानी को असरदार बनाने के लिए कुछ किरदार बेहद अहम होते हैं, जो अपनी परफॉर्मेंस से नायक या नायिका की चमक में इजाफ़ा कर देते हैं। इनकी अदाकारी नायक-नायिका के चरित्रों में उभार आता है। आइए, पिछले साल यानी 2017 के ऐसे ही किरदारों और कलाकारों पर नज़र डालते हैं, जिनकी अदाकारी ने दर्शक के दिलो-ज़हन में छाप छोड़ी, वहीं नायक या नायिका की अदाकारी को मुकम्मल मंज़िल तक पहुंचाया।

मेहर विज-राज अर्जुन

आमिर ख़ान की होम प्रोडक्शन फ़िल्म सीक्रेट सुपरस्टार इस साल की मोस्ट सेलीब्रेटेड फ़िल्मों में शुमार है। एक रूढ़िवादी पिता की दकियानूसी सोच से जूझते हुए अपनी ख़्वाहिशों को परवाज़ देने वाली किशोरवय लड़की की इस कहानी में ज़ायरा वसीम मुख्य किरदार में नज़र आयीं।

ज़ायरा के अभिनय को उनकी मां का किरदार निभाने वाली मेहर विज ने संबंल दिया और इसे निखाकर पूरी चमक के साथ पेश करने में मदद की राज अर्जुन ने, जो ज़ायरा के रूढ़िवादी सोच वाले पिता की भूमिका में थे। इन दोनों सहायक कलाकारों के बिना ज़ायरा का किरदार अपनी आभा बिखेरने में कामयाब नहीं होता।

राजकुमार राव

बॉक्स ऑफ़िस आंकड़ों के खेल को नज़रअंदाज़ कर दें तो राजकुमार राव 2017 के सबसे सफल सितारे हैं। अदाकारी के जितने रंग उन्होंने इस साल पर्दे पर दिखाये, कोई दूसरा अभिनेता उसे छूकर भी नहीं गया। नक्सली इलाक़े में चुनाव कराने जाने वाला न्यूटन का घुंघराले बालों वाला सरकारी क्लर्क हो या मुंबई की बहुमंजिला इमारत के एक फ्लैट में फंसा ट्रैप्ड का बेबस युवक या फिर बरेली की बर्फ़ी का छोटे शहर में रहने वाला दब्बू युवक, जिसका सबसे बड़ा सपना उसकी मां की देखभाल करना भर है। राजकुमार चाहे मुख्य भूमिका में आये या फिर सहायक भूमिका में, राजकुमार की जगह किसी दूसरे कलाकार की कल्पना भी संभव नहीं है। यही सिनेमा के इस राजकुमार की जीत है।

सुधीर पांडेय

अक्षय कुमार की फ़िल्मों का चयन काफ़ी सुधर गया है, जिसकी मिसाल हैं उनकी इस साल आयीं दो फ़िल्में। पहले बात करते हैं टॉयलेट- एक प्रेम कथा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के समर्थन में बनायी गयी इस फ़िल्म में अक्षय की अदाकारी ने प्रभावित किया, लेकिन उनकी अदाकारी को पालने-पोसने और निखारने का काम जिन किरदार ने किया, वो है उनका पिता का, जिसे निभाया सुधीर पांडेय ने। सुधीर इंडस्ट्री के वरिष्ठ कलाकारों में शामिल हैं और अपनी पहचान बनायी है, मगर टॉयलेट- एक प्रेम कथा का रूढ़िवादी ब्राह्मण, सुधीर पांडेय की अभिनय यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

सौरभ शुक्ला-अन्नू कपूर

अक्षय की दूसरी फ़िल्म जॉली एलएलबी2 भी साल की बेहतरीन फ़िल्मों में शामिल है। इस फ़िल्म में अक्षय ने ज़िला न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे वक़ील के किरदार में बढ़िया काम किया, मगर इस किरदार को खुलकर खेलने में जिन दो सहायक कलाकारों ने मदद की, वो हैं जज बने सौरभ शुक्ला और विरोधी वक़ील बने अन्नू कपूर। इन दोनो कलाकारों की उम्दा अदाकारी ने जॉली के चरित्र का प्रभाव कई गुना बढ़ा दिया।

नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी

नवाज़उद्दीन सिद्दीक़ी सिनेमा में उस ओहदे को हासिल कर चुके हैं, जिसके लिए वो कई सालों से जूझ रहे थे। नवाज़ की अदाकारी को अब किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं रही। यही वजह है कि छोटे बजट की फ़िल्मों से लेकर मेगा बजट की फ़िल्मों का वो हिस्सा बन रहे हैं। इस साल शाह रुख़ ख़ान के साथ नवाज़ ने टक्कर का किरदार निभाया। रईस में शराब तस्कर बने शाह रुख़ के किरदार को बराबर की टक्कर देकर उभारने में नवाज़ के किरदार की अहम भूमिका रही।

सजल अली

श्रीदेवी मॉम बनकर पर्दे पर लौटीं तो साथ लेकर आयीं पाकिस्तानी एक्ट्रेस सजल अली को। सजल ने मॉम में श्री की बेटी का किरदार निभाया। बेहद संवेदनशील कहानी पर आधारित इस फ़िल्म में सजल के शानदाकर अभिनय ने श्रीदेवी के मां के किरदार को एक भावनात्मक संबल दिया, जिससे दर्शक जुड़ा हुआ महसूस करता है। सजल का ये हिंदी सिनेमा में डेब्यू था।

अक्षय खन्ना

विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना अदाकारी के मामले में किसी भी तरह अपने पिता से कम नहीं आंके जाते। ये बात अलग है कि उनका करियर अपने पिता की तरह चर्चित और सफल नहीं रहा, मगर फिर भी अक्षय की काबिलियत पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। अक्षय ने इत्तेफ़ाक़ और मॉम में अपनी अदाकारी से ये बात साबित कर दी कि अभी भी उनके भीतर बहुत कुछ बाक़ी है। बस उसे बाहर निकालने का सही मौक़ा मिलना चाहिए।

वरुण शर्मा

फुकरे रिटर्न्स में मुख्य किरदार वैसे तो पुल्कित सम्राट ने निभाया है, मगर इसके सहायक किरदार नायक से कम नहीं। ख़ासकर वरुण शर्मा, जिनके बिना फुकरों की कोई कहानी मुकम्मल नहीं होती। वरुण ने अपनी अदाकारी से ना सिर्फ़ फ़िल्म को रफ़्तार दी, बल्कि दूसरे चरित्रों को उभारने में मदद की। फिर चाहे वो फ़िल्म के मुख्य कलाकार हों या भोली पंजाबन बनी रिचा चड्ढा।

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