नशें के विरुद्ध अभियान: पंजाब सरकार ने सरकारी और प्राईवेट यूनिवर्सिटियों के साथ की विशेष मीटिंग

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आई 1 न्यूज़ अमित सेठी

 

स्पैशल टास्क फोर्स की उपस्थिति में विभिन्न विभागों के प्रमुख और उप -कुलपति द्वारा लिए गए अहम फैसले

चंडीगड़, 28 दिसंबर:

पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उदे्श्य से स्पैशल टास्क फोर्स की तरफ से पंजाब में विभिन्न यूनिवर्सिटीस के वाइस चांसलर्स/प्रतिनिधी की मीटिंग मार्कफैड कार्यालय में करवाई गई। इसमें उनसे नशा मुक्त पंजाब बनाने के लिए राय, सुझाव प्राप्त किए गए। इस मीटिंग का उद्ेश्य युवाओं और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित और जागरूक करके नशे से बचाना है। 

इस मीटिंग की अध्यक्षता एडिशनल चीफ सैक्रेटरी हायर एजूकेशन श्री एस.के. संधू द्वारा की गई।  इसमें स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती अंजली भावड़ा, सैक्रेटरी होम श्री राहुल तिवाड़ी, एडीजीपी, स्पैश्ल टास्क फोर्स के आईजी श्री हरप्रीत सिंह सिद्धू, ज्वाइंट डायरैक्टर उच्च शिक्षा डा. जीएस बराड़ विशेष तौर पर मौजूद रहे। इस दौरान श्री एस.के. संधू ने कहा कि पंजाब में नशे को खत्म करने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। इसके लिए स्टेट टास्क फोर्स जहां नशे की तस्करी को रोकने के प्रयास कर रही है, वहीं युवाओं को नशे से बचाने के लिए विकल्प मुहैया करवा रही है। इसके साथ ही युवाओं को नशे से बचाने के लिए बचाव (प्रीवेंटिव) के लिए कार्य कर रही है। इसके लिए विद्यार्थियों को जागरूक करना जरूरी है तांकि उन्हें नशे की तरफ जाने से रोका जा सके। इसके लिए उन्हें समझाने और आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। इसके चलते ही यूनिवर्सिटी में प्रोग्राम की शुरुआत करने की कारूरत महसूस की गई। इसके लिए सभी यूनिवर्सिटीस में विद्यार्थियों को नशे से बचाने के लिए नोडल अ$फसर नियुक्त करें, जिसका वाईस चांसलर या चांसलर के स्तर पर रिव्यू किया जाए। इसे सिर्फ एक इवेंट की तरह नहीं बल्कि इसे एक अभियान की तरह कॉलेजों में लागू किया जाए और यूनिवर्सिटी स्तर पर ही पंजाब सरकार की मदद के साथ यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों को नशे से बचाने के प्रयास करें। 

इस दौरान प्रमुख सचिव श्रीमती अंजली भावड़ा ने कहा कि पंजाब में लोगों को नशे से बचाने के लिए इलाज की सुविधाएं मुफ्त मुहैया करवाई जा रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर मानसिक रोगों के माहिर डाकटर तैनात किए गए हैं, जो मरीजों को नशा छुड़ाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में लोगों को नशे से उभारने के लिए विशेष आउटपेशेंट ओपिओड अस्सिटड ट्रीटमैंट प्रोग्राम की शुरुआत की गई है। इस प्रोग्राम के तहत नशे से बचाने के लिए युवाओं को नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल करने के बजाए ओपीडी में दवाई देकर नशा छुडवाने में मदद की जाती है। 

इस अवसर पर आईजी श्री हरप्रीत सिंह सिद्धू ने कहा कि जो युवक नशे में चले गए हैं, वह भी अपने समाज का हिस्सा हैं और उनके साथ अच्छा व्यव्हार करें और उन्हें नशा छोडऩे के लिए उनकी मदद करें। पंजाब सरकार की तरफ से हर गली मोहल्ले में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए लोगों का सहयोग बहुत कारूरी है। उन्होंने कहा कि स्टडी के मुताबिक किशोर खास तौर पर 25 वर्ष तक की उम्र के बच्चों पर ज्यादा प्रेशर रहता है। इसके लिए स्कूल अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच में ही उनके साथियों के कारीए नशे से दूर रहने और अगर उन्हें कोई नशे के लिए प्रेरित करता है तो उससे कैसे दूर रहना है, जिसके तरीके बताए जाएं और इसके साथ ही उनके स्किल को बढ़ाया जाए तांकि उनका आत्मविश्वास बढ़ सके और वह नशे से दूर रहें। उन्होंने वाईस चांसलरस को बड्डी प्रोग्राम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 5 विद्यार्थियों की एक ही क्लास/बैच का ग्रुप बनाया जाए, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह एक दूसरे को नशे से बचाने के प्रेरित करें। बड्डी नशे की गंभीर समस्या पर चर्चा करेंगे। श्री सिद्धू ने जानकारी, रवैया, यकीन व अभ्यास (नॉलेज, एटीट्यूट, बिलीफ और प्रेक्टिस (केएबीपी)) को लागू करने पर जोर दिया। 

इस अवसर पर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला, जीएनडीयू अमृतसर, गुरु कांशी यूनिवर्सिटी तलवंडी साबो, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, आदेश यूनिवर्सिटी बठिंडा, रयात बाहरा यूनिवर्सिटी मोहाली, जीएनए यूनिवर्सिटी फगवाड़ा, अकाल यूनिवर्सिटी, श्री गुरु राम दास यूनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइंस अमृतसर, एलपीयू, श्री गुरु ग्रंथ साहिब यूनिवर्सिटी और पीबीजीसीटीए के वाइस चांसलर व प्रतिनिधी मौजूद थे। 

इस दौरान वाइस चांसलर और प्रतिनिधीयों ने अपनी यूनिवर्सिटीस में युवाओं को नशे से बचाने के बारे में चलाए जा रहे प्रोग्रामों के बारे में अवगत करवाया और सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी के नकादीक खोका, कुछ समय के लिए आए छोटे वैंडर को हटाया जाए। इसके साथ यूनिवर्सिटीस के विद्यार्थियों और एसएसपी का विशेष सैशन करवाया जाए। इसी तरह हॉस्टल में यूनिवर्सिटी स्टाफ की तरफ से समय समय पर विशेष जांच की जाए। विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए यूनिवर्सिटी में चलाए जा रहे रेडियो चैनल व अन्य जागरूकता माध्यमों के कारीए जागरूक किया जाए।

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