समाज की कुरीतियों पर सरल शब्दों में व्यंग्य करता है प्रहारः राकेश कंवर

0
981

आई 1 न्यूज़ : संदीप कश्यप

सोलन दिनांक 16.12.2017

श्री लाल शुक्ल एवं शरद जोशी पर केन्द्रित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम आरम्भ
उपायुक्त सोलन राकेश कंवर ने कहा कि व्यंग्य साहित्य की ऐसी विधा है जिसके माध्यम से सरल एवं सपाट शब्दों में समाज की कुरीतियों, विषमताओं तथा असमानताओं को उभार कर उन पर प्रहार किया जाता है। राकेश कंवर आज यहां भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा सुप्रसिद्ध लेखक एवं व्यंग्यकारों श्री लाल शुक्ल एवं शरद जोशी पर केन्द्रित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
राकेश कंवर ने कहा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में व्यंग्य को विशिष्ट अधिमान प्राप्त है। व्यंग्य के माध्यम से लेखक समाज एवं सरकारी तंत्र में व्याप्त कुरीतियों को साधारण शब्दों में पाठकों तक लाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी साहित्य में श्री लाल शुक्ल तथा शरद जोशी को व्यंग्यात्मक लेखन का सिरमौर माना जाता है। इन दोनों लेखकों ने विभिन्न साहित्यिक कृतियों के माध्यम से स्वतंत्रता के बाद के भारत में उपजी विषमताओं, भ्रष्टाचार तथा ग्राम्य एवं शहरी जीवन की असमानताओं पर चोट की है।
उपायुक्त ने कहा कि ऐसे आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण हंै कि इनके द्वारा युवा पीढ़ी को साहित्य के विभिन्न आयामों को सीखने एवं समझने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में जहां श्री लाल शुक्ल एवं शरद जोशी की विभिन्न साहित्यिक कृतियों पर सारगर्भित चर्चा की जाएगी, वहीं इनके लेखन से जुड़े विभिन्न आयामों को भी उभारा जाएगा। उन्होंने आशा जताई कि यह दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम प्रदेश के उभरते लेखकों एवं युवाओं को व्यंग्य के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाने में सहायक सिद्ध होगा।
राकेश कंवर ने श्री लाल शुक्ल पर अपने व्याख्यान में कहा कि श्री लाल शुक्ल को देश तथा विदेश में मुख्य रूप से उनके प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक उपन्यास ‘राग दरबारी’ के लिए जाना जाता है। ‘राग दरबारी’ हिन्दी साहित्य की अनुपम कृति है। श्री लाल शुक्ल का जन्म 31 दिसम्बर, 1925 को उतर प्रदेश में हुआ तथा उन्होंने प्रांतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए विभिन्न पदों पर कार्य किया। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए सेवानिवृत हुए। श्री लाल शुक्ल ने स्वर्ण ग्राम और वर्षा, अंगद का पांव, सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, सीमाएं टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, बिसरामपुर का संत तथा राग-विराग जैसी विशिष्ट कृतियां हिन्दी साहित्य को प्रदान की। उनके लेखन में समाज में टूटती नैतिक परम्पराएं, नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा ग्राम्य जीवन की दुशवारियों पर सटीक व्यंग्य किया गया है। उन्होंने आदमी का ज़हर नामक एक जासूसी उपन्यास भी लिखा।
राकेश कंवर ने कहा कि शरद जोशी ने कहानी, नाटक, कविता एवं व्यंग्य के द्वारा समाज की कुरीतियों एवं समसामायिक विषयों पर चोट की। उन्होंने टेलीविजन पर प्रसारित अनेक नाटकों की पटकथा भी लिखी। अथ श्री गणेशाय नमः, बिल्लियों का अर्थशास्त्र, बुद्धिजीवी, साहित्य का महाबली तथा अध्यक्ष महोदय सहित एक था गधा उर्फ अलादाद खान तथा अंधों का हाथी उनकी प्रसिद्ध कृतियां हैं। उन्होंने टीवी सीरियल ये जो है ज़िदंगी, विक्रम और बेताल तथा लापता गंज सहित अनेक नाटकों की पटकथाएं भी लिखी।
इस अवसर पर लेखक डाॅ. स्वाति, अजय, नीलम कपूर, डाॅ. रत्नेश त्रिपाठी तथा संजू पाॅल ने ‘राग दरबारी’ उपन्यास के विभिन्न अंशों की पाठ के माध्यम से जानकारी दी। डाॅ. निरंजन देव शर्मा ने ‘राग दरबारी-एक तुलनात्मक आख्यान’ विषय पर आलोचनात्मक लेख, डाॅ. रत्नेश त्रिपाठी ने ‘राग दरबारी- रूप्पन बाबू का चित्रण तथा समीक्षात्मक मूल्यांकन’ विषय पर लेख तथा डाॅ. उरसेन लता द्वारा ‘संवाद के बहाने पर कुछ बात’ विषय पर लेख प्रस्तुत किया गया। प्रतिभा शर्मा ने शरद जोशी की कृति ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खान’ पर चर्चा की।
परिचर्चा में विभिन्न लेखकों ने भाग लिया।
इस अवसर पर प्रदेश की प्रसिद्ध लेखिका मीनाक्षी चैधरी कंवर, साहित्यकार शंकर विशिष्ट, डाॅ. तुलसी रमन, ओम भारद्वाज, कवि एवं आलोचक आत्मा रंजन, डाॅ. प्रेम लाल गौतम, केवल राम कश्यप, लोकेन्द्र चैहान, राधा चैहान, मंजुला ठाकुर, मदन हिमाचली, संवाद कुल्लू से आए साहित्यकार अक्षत, अभिषेक, आशा, रीना, खेमराज, हेमराज, अजय, दुष्यंत, राजन, सोम लता, महेन्द्र, भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी शरभ नेगी, भारतीय प्रशासनिक सेवा की परिवीक्षाधीन अधिकारी तोरूल रवीश, सहायक आयुक्त बीआर शर्मा सहित अन्य साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
.0.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here