पुलिस की धारा 146-147 के तहत कारवाही की धमकी

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आई 1 न्यूज़ : राजेंदर भट्टी

पच्छाद (सराहा) पुलिस के कुछ अधिकारी दिनांक 09-12-2017 को (जिनके नाम प्लेट नहीं लगी थी व् शायद जेकेट के अन्दर लगाईं गई हो !) बिना किसी पूर्व सुचना के ग्राम पंचायत नारग के ग्राम मोहर में सुभाष जडेजा के घर पर पहुंचे और नारग-मोहर सड़क को बाधित करने का आरोप लगाने लगे ! जो कि किसी तरह से बाधित नहीं की गई थी ! और जबरदस्ती आरोप मनवाने लगे ! जबकि उन्होंने शिकायत पत्र भी नहीं दिखाया ! जब जड़ेजाने  आरोप मानने से इनकार किया और कहा की कहाँ हमने नारग-मोहर सड़क बाधित किया है ! जरा प्रमाण दिखाए तो ! तब उन्होंने हमे धारा 146-147 लगाने की धमकी दे डाली ! ज्ञात रहे धारा 146-147 तब लगाईं जाती है जब कोई व्यक्ति लोगो के गैर क़ानूनी जमाव जोकि किसी गैरकानूनी ढंग से अपनी मांग मनवाने के लिए एकत्रित हुआ हो व् उस जमाव के सदस्य या सदस्यों द्वारा किसी प्रकार की हिंसा का या बल का प्रयोग किया जा रहा हो ! जिससे जान माल की हानि होती हो तो यह दंगा है ! जो कि इंडियन पैनल कोड की धारा 146 में आता हैं ! धारा 147 के अनुसार पुलिस दंगा करने वालो को गिरफदार कर सकती है ! लेकिन यहाँ कोन सा जमाव था ! या दंगा करने वाले थे !  यहाँ  जडेजा के घर पे मेरे वृद्ध माँ बाप थे और जडेजा अपनी पत्नी व् बच्चो सहित खेतो में काम कर रहा था ! उसे फ़ोन करके घर बुलाया गया ! और पुलिस के साथ जो लोग थे उनकी संख्या 7-8 थी ! तो जमाव भी पुलिस का था और धारा 146-147 की धमकी मेरे माँ बाप को दे रहे थे !

(इंडियन पैनल कोड की धारा 147की कारवाही तो 25 अगस्त 2017 को राम रहीम को सजा होने के बाद पंचकुला व् आसपास के स्थानों में भीड़ इकठा होने से हुई हिंसा व् जानमाल के नुक्सान के बाद की गई थी ) प्रश्न यह है कि यहाँ कोन सी भीड़ थी ! हिंसा और जानमाल का नुक्सान हो रहा था ! जो कि जबरदस्ती यह धाराए लगाने की धमकी देने लगे ! और पुलिस किसके इशारे पर यह फर्जी कार्यवाही करने लगी ! मुझे तो यह संदेह है की भविष्य में मेरे घर पे जान माल का नुक्सान हो सकता है ! व् किसी साजिश के तहत फर्जी कारवाही के तहत किसी भी केस में फंसाया भी जा सकता है !

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