समाजिक विचारों व दृष्टीकोण में सकारात्मक बदलाव कानूनी व्यवस्थाओें द्वारा संभव

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आई 1 न्यूज़ : संदीप कश्यप

शिमला, 09 दिसम्बर,

समाजिक विचारों व दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव कानून के तहत विभिन्न व्यवसथाओें द्वारा संभव हुआ है । ये विचार गत देर सांय पिटरहाॅफ मे हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला द्वारा 21वीं सदी में कानून एवं न्याय में निर्देशात्मक बदलाव-चुनौतियां एवं अवसर विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं कुलपति हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय न्यायमूर्ति संजय करोल ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न विकास क्रमों व सामाजिक सुधारों को कानून के माध्यम से ही सूनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मसलों पर मानक तय कर कानून ने कमजोर व असहाय वर्ग के हितों का संरक्षण किया है।उन्होंने कहा कि सती प्रथा, बाल विवाह व दहेज प्रथा की रोकथाम, बेटियों को जायदाद में हिस्सेदारी तथा छुआछूत को अवैध करार देने के अतिरिक्त बहुत से एसे बिन्दु हैं जिसमें कानून के माध्यम से नियम बनाकर इन्हें लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन में विधि से संबन्धित विभिन्न पहलुओं व विषयों पर चर्चा होगी जिसके साकारात्मक परिणाम होंगे। उन्होेेंने कहा कि आज के परिपेक्ष में यह विषय चुनौतिपूर्ण है, जिस पर चर्चा करना अनिवार्य है। कानूनी शिक्षण संस्थानों का दायित्व न केवल योग्य विधिवक्ताओं की अगली पीढ़ि तैयार करना, बल्कि सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक मुद्दों में विधिक विचारों को भी कायम रखना है।इस अवसर पर उन्होंने गुरविन्दर सिंह द्वारा लिखित पुस्तक तथा विश्व विद्यालय की स्मारिका का भी विमोचन किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा सुश्री रेखा सिंह ने न्यायिक प्रणाली व न्यायाल्यों में महिलाओं के तुष्टिकरण व उनके प्रति अनुचित व्यवहार पर चिन्ता व्यक्त की । उन्होंने विश्वास जताया कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन में महिला तुष्टिकरण

व संबद्ध विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने इस अवसर पर अपने कुछ सुझाव भी व्यक्त किए।

विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. एससी रैणा ने अपने स्वागत संबोधन में सम्मेलन की रूपरेखा के संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के संदर्भ में कानून निर्माण उसके विवेचन और उन्हें लागू करने में कई प्रकार के बदलाव आ रहे हैं, उन विषयों पर अर्थपूर्ण विचार एवं चर्चा करने के उद्देश्य से इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर देशभर के विख्यात कानूनविदों, विधिकर्ताओं को एक मंच प्रदान किया जा रहा है।

उन्हांेने कहा कि शिमला में इस सम्मेलन का आयोजन हमारे लिए गौरवमयी क्षण है। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में कानून एवं न्याय में निर्देशात्मक बदलाव की विभिन्न स्थितियों पर विचार करने के लिए सामाजिक संदर्भों के बदलाव में व्यक्तिक कानून, न्याय प्रशासन व न्यायालय की अनुपालना, पर्यावरण क्षय व सामाजिक न्याय एवं अन्याय, मैरिटल रेप मैट्रीमोनियल आॅब्लीगेशन एंड डिगनिटी आॅफ वुमेन सहित कुल आठ विषय सम्मेलन में चर्चा का केंद्रबिंदु रहेंगे।

समारोह में प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायधीश न्यायमुर्ति त्रिलोक चैहान, न्यायमुर्ति विवेक ठाकुर, न्यायिक प्रणाली के अन्य संस्थानों के पदाधिकारी व बाहर से आए प्रतिनिधियों के अतिरिक्त राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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