कैदी जेल से फरार, दो संतरियों को किया निलबिंत

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ब्यूरो रिपोर्ट : शिमला
हत्या और दुराचार के तीन विचाराधीन कैदी जेल से फरार हो गए हैं। पुलिस इनकी तलाश के लिए चप्पा-चप्पा छान रही है। मामला शिमला का है। आदर्श कंडा जेल से तीन विचाराधीन कैदी फरार हो गए। तीनों नेपाली मूल के हैं और इन पर हत्या और दुराचार के संगीन आरोप है।

आरोपियों में लीलाधर , प्रताप सिंह और प्रेम बहादुर शामिल है। जेल प्रशासन को फरारी का पता सुबह सवा चार बजे लगा। आरोपियों की तलाश की जा रही है। जेल प्रशासन ने डयूटी पर तैनात दो संतरियों को निलबिंत कर दिया गया है और विभागीय जांच बिठा दी गई है। विचाराधीन कैदियों की फरारी ने जेल प्रशासन के साथ साथ पुलिस महकमे को भी सकते में डाल दिया है।

कंडा जेल के भीतर से किसी कैदी के भाग जाने का यह पहला मामला सामने आया है। पेशी पर कैदियों को ले जाते हुए कैदी के फरार होने के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन अति सुरक्षित समझी जाने वाली कंडा जेल से फरारी के मामले ने जेल प्रशासन के पुख्ता सुरक्षा इंतजाम की पोल खोल कर रख दी है।

तीन विचाराधीन कैदियों की फरारी का मामला काफी रहस्यमयी है। कड़ी सुरक्षा के बीच कैदी कैसे फरार हो गए? क्या किसी ने उन्हें भागते हुए नहीं देखा या फिर जब वे ब्लेड से सरिया काट रहे थे तो भी किसी की नजर में नहीं आए? ऐसा कैसे संभव हो सकता है। तीनों आरोपी बैरक नंबर 4 में रखे हुए थे।
उस बैरक में कुल 28 कैदी हैं। क्या एक भी कैदी को उनकी हरकत नजर नहीं आई। पुलिस कह रही है कि उस समय सभी कैदी सो रहे थे। ऐसी भी चर्चा है कि कुछ कैदियों को पेठा भी खिलाया गया। इसमें कितनी हकीकत है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा।

मान भी लिया जाए कि जिस समय वे ब्लेड से सरिया काट रहे थे तो इसकी आवाज साथी कैदियों को नहीं सुनाई दी, क्योंकि सभी गहरी नींद में थे। इसके पीछे पुलिस का यह तर्क है कि सरिये को काटने से पहले कैदियों ने उस पर साबुन लगा दिया था, ताकि कोई आवाज न आए। सरिया काटकर बैरक से बाहर निकल गए और वह भी कंबल लेकर।

 

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