कैपटन अमरिन्दर सिंह सरकार द्वारा किसानों को और ज्यादा समर्थ बनाने के लिए पांच सदसीय आयोग की स्थापना के लिए बिल लाने का फैसला

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आई 1 न्यूज़ चंडीगड़, 27 नवंबर: कैपटन अमरिन्दर सिंह सरकार द्वारा किसानों को और ज्यादा समर्थ बनाने के लिए पांच सदसीय आयोग की स्थापना के लिए बिल लाने का फैसला किसानें के कल्याण और समस्याएँ सुलझाने पर केंद्रित होगा आयोग पंजाब सरकार ने आज किसानों को और अधिक समर्थ बनाने और कानूनी हक देने के लिए नीति बनाने के लिए पाँच सदस्यीय आयोग की स्थापना के लिए विधान सभा के मौजूदा सत्र के दौरान एक बिल पेश करने का फ़ैसला किया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने ‘पंजाब राज्य किसान और कृषि श्रमिकोंं संबंधीे आयोग -2017 ’ आज से शुरू हो रहे विधान सभा के सत्र के दौरान पेश करने का फ़ैसला लिया है।
इस आयोग के  नेतृत्व नामित चेयरपर्सन करेगा जिस का कैबिनेट रंैक होगा और इस को जि़ला और ब्लाक स्तर पर कृषि नीतियां बनाने की योजना का कार्य सौंपा जायेगा।
राज्य सरकार द्वारा समय -समय पर आयोग को सौंपे कृषि संबंधी मामलें और ठोस नीतियां बनानेे संबंधी विस्तृत जानकारी मुहैया करवाना आयोग  की शक्तियों में शामिल होगा। सरकार के पास उन विषयों को आयोग के हवाले करने की शक्ति होगी जिन का फ़ैसला किया जा सकता है और आयोग के लिए नियम बनाने भी इस में शामिल होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि आरंभ में आयोग  का 25 करोड़ रुपए का कॉर्पस फंड होगा और अगले पाँच सालों के लिए राज्य सरकार द्वारा पाँच करोड़ का अनुदान दिया जाएगा। आयोग  को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी जिसको पंजाब विधान सभा में पेश किया जाएगा।
प्रवक्ता ने बताया कि नामित चेयरपर्सन और एक सदस्य सचिव के अलावा पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना और गुरू अंगद देव यूनिवर्सिटी आफ वैटरनरी साईसिज़ लुधियाना के उप कुलपति और अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास /वित्त कमिशनर विकास इस आयोग  के सदस्य होंगे। कमीशन का मुख्यालय चण्डीगढ़ में होगा।
आयोग  का चेयरपर्सन राज्य सरकार द्वारा नामित किया जायेगा जो कम से -कम गै्रजूएट डिग्री हासिल प्रगतिशील किसान या एक कृषि वैज्ञानिक जिस को कृषि क्षेत्र में घेरलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उचित अनुभव हो। चेयरपर्सन को राज्य सरकार के कैबिनेट रैक का दर्जा दिया जायेगा और इस मुताबिक ही उस की वेतन और भत्तों के अलावा सेवा -शर्ते तय की जाएंगी। आयोग  का सदस्य सचिव राज्य सरकार के सचिव स्तर के रैक का होगा और उसका वेतन, भत्ते और नियुक्ति संबंधी अन्य शर्तेंं सरकार की तरफ से तय की जाएंगी।
आयोग  के पास एक सलाहकारी कौंसिल होगी जिस में 15 से अधिक मैंबर होंगे जिन में से 7 सदस्य प्रगतिशील किसान और फूड प्रोसेैसर, कृषि मशीनरी, कृषि उद्यमी, अकादमिक और कृषि वैज्ञानिक आदि का एक -एक सदस्य होगा। सलाहकारी कौंसिल के मैंबर आयोग द्वारा नामित किये जाएंगे जिन का कार्यकाल तीन वर्षो का होगा। आयोग  की उसकी ज़रूरत अनुसार सलाहकारी कौंसिलों होंगी जिन को कौंसिल द्वारा ही नामित किया जायेगा। यह कौंसिलों कृषि नीतियाँ और प्रोग्रामों और अन्य सम्बन्धित मामलों में सरकार को आवश्यक सलाह देने के लिए आयोग को अपेक्षित जानकारी देंगी।
आयोग के एजंडे संबंधी विस्तार में बताते हुये प्रवक्ता ने बताया कि कृषि पर निर्भर लोगों के कल्याण और अधिकार मुहैया करवाने के लिए आयोग अपनी भूमिका अदा करेगा। इन लोगों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा सम्बन्धित मामलों संबधंी आयोग से विचारविमर्श किया जायेगा।
प्रवक्ता ने बताया कि आयोग द्वारा कृषि पर निर्भर लोगों और विभिन्न किसान संगठनों को पेश आ रही समस्याओं और मांगों पर विचार किया जायेगा और इन के प्रतिनिधियोंं से समय -समय पर बैठकें की जाएंगी। इस संदर्भ में ही आयोग द्वारा सरकार को अपनी, सिफारशें भेजी जाएंगी।
प्रवक्ता ने बताया कि आयोग को खेती नीति बनाने का जिम्मा सौंपा जायेगा जो किसानों की आमदन बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता और कृषि उत्पादन मुहैया करवाएगा। आयोग द्वारा आंकड़े एकत्रित करने, जानकारी, सलाह, समीक्षा, निगरानी, सर्वेक्षण और अन्य अपेेक्षित कदम उठाए जाएंगे जिसका मकसद कृषि और सहायक व्यवसायों, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, कृषि प्रसार और शिक्षा, सरकार और निजी सहित सभी द्वारा मुहैया करवाई जा रही कृषि वस्तुएँ और लागतों की गुणवत्ता और वितरण में सुधार लाना है। इसी तरह में ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से सम्बन्धित रोजग़ार के अवसर सृजन करने को प्रोत्साहन देना है।
आयोग द्वारा कृषि उत्पादन, किसी चीज़ से अन्य वस्तुएँ तैयार करने, फ़सल की कटाई उपरांत स्थिति के साथ सुलझने और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मंडी में प्रतिस्पर्धा का पता लगाने, भविष्य  रुझान, स्थानीय मांग, निर्यात की संभावनाएंं, आयात प्रतिस्थापन और वस्तुएँ /लागतें और सेवाएं मुहैया करवाने के लिए सहकारिता को प्रोत्साहन देने के लिए आंकड़े इकठ्ठा करके अध्ययन करने, मंडीकरण से सम्बन्धित सिफारशें देने के अलावा नयी तकनीक अपनाएगा जिससे ग्रामीण आर्थिकता में आर्थिक स्थिरता स्थापित करने के साथ-साथ कुशलता बढ़ाई जा सके।

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