24 सप्ताह के नवजात को पैदा होने के बाद कई सारी मुश्किलों के बावजूद बचा लिया गया मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल

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आई 1 न्यूज़ अक्सर कहा जाता है कि धरती पर चमत्कार होते हैं और सुश्री प्रीति की नवजात बेटी का चमत्कारी ढंग से बचना, इसी बात की पुष्टि करता है। इस बच्ची का जन्म सी-सेक्शन के माध्यम से 12 अगस्त, 2017 को गर्भावस्था के 24 सप्ताह (अपेक्षित डिलीवरी की तारीख से 4 महीने पहले) के अंदर ही जन्म हुआ था और जन्म के समय उसका वजन सिर्फ 670 ग्राम था। उनके फेफड़े भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए थे और उसे डिलीवरी रूम से ही वेंटिलेटर प्रदान किया गया ताकि उसकी जिंदगी को कोई खतरा पेश नहीं आए। इसके बाद, बच्ची को फोर्टिस अस्पताल, मोहाली के लेवल 3 एडवांस एनआईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया।’’
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इस अवसर पर  फोर्टिस के फेसिलिटी डायरेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि हर मुश्किल के चलते इस बच्ची को फोर्टिस द्वारा बचाया गया है। जिसका श्रेय बच्ची के माता पिता को भी जाता है जिन्होंने अपनी  बेटी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हमें गर्व है कि हम इस प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन पाये। इस बच्ची को मिली नई जिंदगी के बारे में डॉ.सुनील कुमार अग्रवाल, कंसल्टेंट, नियोनटोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली ने आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आज मीडिया को बताया कि बच्ची को अपने स्तर पर सांस लेना शुरू करने से पहले करीब 9 सप्ताह तक कृत्रिम सांस सहायता की जरूरत पड़ी और आज बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है।
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डॉ.अग्रवाल ने बताया कि ‘‘24 हफ्तों के नवजात के अधिकांश अंग अच्छे तरीके से नहीं बनते हैं। अपनी जरूरत के अनुसार महत्वपूर्ण मात्रा में स्तनपान करने से करीब 10 दिन पहले तक उसे इंट्रावेनस न्यूट्रीशन को शुरू करने की जरूरत थी ताकि वह स्तनपान से पिए जाने वाले दूध को हजम कर सके। धीरे-धीरे, बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल में 75 दिन रहने के बाद छुट्टी मिल गई है। अस्पताल से छुट्टी के समय बच्ची का वजन 1.4 किलोग्राम था। बच्ची न्यूरोलॉजिकल तौर पर सामान्य है, चम्मच से खुराक को अच्छी तरह से ले रही है और उसकी सुनने और देखने की क्षमता भी सामान्य है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे लंबी अवधि में सामान्य न्यूरोलॉजिकल विकास की क्षमता भी प्राप्त है।’’
मीडिया के साथ अपनी बातचीत के दौरान, सुश्री प्रीति ने कहा कि ‘‘जन्म के समय हमारी बच्ची का जन्म सिर्फ 670 ग्राम था और जन्म के बाद वजन लगातार कम हो रहा था। उसे लगातार नियोनटाल आईसीयू में रखा गया और हम उसके भविष्य को लेकर चिंतित थे। तब, डॉ सुनील अग्रवाल ने हमें आश्वासन दिया कि वह बच जाएगी। उनका विश्वास था कि वह एक स्वस्थ शिशु के तौर पर उसे घर भेजेंगे और उनके विश्वास के साथ हम भी आगे बढ़ते रहे। हॉस्पिटल स्टाफ भी बहुत ही संवेदनशील है और उन्होंने हमारी बेटी की देखभाल अपनी बेटी की तरह की। मुझे ‘दिल से’ लगता है कि हमने फोर्टिस में अपने बच्चे को जन्म देने का सबसे अच्छा फैसला किया।’’
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बच्ची जिसका नाम डोरथी रखा गया है, के पिता प्रवीण कुमार जो कि समाना की एक छोटी सी कताई मिल में व्यापारी हैं, वे 75 दिन लगातार फार्टिस में बस के माध्यम से अपनी पत्नी की सहायता के संबंध में आते रहे । उनकी पत्नी प्रीति उनके इस समर्थन से बेहद खुश हैं। उनकी की एक अन्य 10 वर्षीय बेटी है जो कि पटियाला में पढ़ती है।
22-24 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच पैदा हुए बच्चे को सीमित संभावनाओं के बीच पैदा हुए बच्चों के तौर पर माना जाता है, क्योंकि वे काफी अधिक समय तक अपनी मां पर ही निर्भर करते हैं और उनके लिए जोखिम लगातार बने रहते हैं। लेकिन आधुनिक तकनीकों और बेहतर मेडिकल केयर के साथ अब ऐसे काफी छोटे और समय पूर्व पैदा होने वाले नवजात शिशुओं को बचाया जा सकता है। इस दौरान उनका सामान्य न्यूरोलॉजिकल विकास भी जारी रहता है। समय से पूर्व पैदा होने वाले अधिकांश बच्चे लंबे समय तक आईसीयू में रहने के दौरान संक्रमण या सेप्सिस के शिकार होते हैं, जो मुख्य रूप से हाथ की स्वच्छता की कमी के कारण होता है। वहीं अनस्र्टिल किए गए उपकरणों और अपर्याप्त एनआईसीयू सफाई प्रक्रियाओं के चलते भी बच्चों को संक्रमण या सेप्सिस हो जाता है। हालांकि, इस तरह के बच्चों को उनके विकास और न्यूरोलॉजिकल विकास के मूल्यांकन के लिए लंबी अवधि तक डॉक्टर या अस्पताल में फॉलोअप की भी जरूरत पड़ती है। उन्हें आम तौर पर 3-5 वर्ष की उम्र तक नियमित आधार पर चैकअप की जरूरत रहती है।
डॉ.अग्रवाल ने कहा कि ‘‘प्रीति की बच्ची को अब अस्पताल में काफी प्यार के साथ बुलाया जाता है और वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उसकी मुस्कान भी काफी अच्छी है। हमें इस बात पर गर्व है कि वह 24 सप्ताह पर पैदा हुई पहली बच्ची है, जिसे ट्राईसिटी में बचाया गया है।’’

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