चित्रकूट उपचुनाव में 14 हजार वोटों से कांग्रेस की जीत, बीजेपी करेगी हार का रिव्यू

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  Nov 12, 2017
चित्रकूट में 9 नवंबर को वोटिंग हुई थी। करीब 65.07% लोगों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया था।
चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव की काउंटिंग पूरी हो गई। कांग्रेस कैंडिडेट नीलांशु चतुर्वेदी 19 राउंड की गिनती के बाद 14,333 वोटों से जीत गए। बीजेपी ने पहले राउंड में ही बढ़त बनाई थी। उसके बाद हर राउंड में पिछड़ती चली गई। एमपी बीजेपी अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि इन नतीजों की समीक्षा की जाएगी। बता दें यह सीट कांग्रेस विधायक प्रेम सिंह के निधन के बाद खाली हुई थी।
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    जीत की खुशी मनाते कांग्रेस के नेता और समर्थक।
    हम जनादेश को स्वीकार करते हैं- BJP
    – नंद कुमार चौहान ने भोपाल में कहा कि कांग्रेस को परंपरागत सीट होने का फायदा मिला और हम जनादेश को स्वीकार करते हैं।
    – जब चौहान से कैंडिडेट के चयन में गलती होने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इन नतीजों की समीक्षा करेगी।
    किसे, कितने वोट मिले?
    पार्टी कैंडिडेट वोट
    कांग्रेस नीलांशु चतुर्वेदी 66,810
    बीजेपी शंकरदयाल त्रिपाठी 52,477
    65% से ज्यादा वोट पड़े थे
    – राज्य इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, वोटों की काउंटिंग शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चल हुई। इस काम को करीब 70 कर्मचारियों ने किया।
    – चित्रकूट में एक लाख 98 हजार 122 मतदाता हैं। इनमें एक लाख छह हजार 390 पुरुष, 91 हजार 730 महिला और दो थर्ड जेंडर शामिल हैं।
    – यहां 9 नवंबर को वोटिंग हुई थी। करीब 65.07% लोगों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया था। उपचुनाव में 9 निर्दलीय समेत 12 कैंडिडेट ने चुनाव लड़ा।
    किन-किन के बीच था मुकाबला था?
    – मुख्य मुकाबला बीजेपी के शंकरदयाल त्रिपाठी और कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी के बीच था।
    – इससे पहले दोनों पार्टियों ने इस चुनाव को जीतने के लिए जोर लगा दिया था। बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आखिरी वक्त में प्रचार की कमान संभाली थी। यहां उन्होंने कई संभाएं और रोड शो किए थे। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान समेत कई मंत्रियों ने रैलियां की थीं।
    – कांग्रेस की ओर से यहां पूर्व केंद्रीय मंत्रियों कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभाएं की थीं। ये सीट नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के लिए प्रतिष्ठा बन गई थी, इसलिए उन्होंने यहां काफी वक्त दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने भी यहां प्रचार किया था।

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