समय के साथ दिन प्रतिदिन पशुपालन फायदे का सौदा बनता जा रहा है।

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चण्डीगढ़, 28 अक्टूबर – समय के साथ दिन प्रतिदिन पशुपालन फायदे का सौदा बनता जा रहा है। गाय व भैंस पालने के कार्य से आगे जाते हुए अब प्रदेश के लोग घोड़ा, बकरी-भेड और सूकरपालन में भी हाथ आजमा रहे हैं और उन्हें लाखों रूपए का मुनाफा भी हो रहा है।to day news in chandigarhझज्जर में चल रहे स्वर्ण जयंती राज्य पशुधन प्रदर्शनी के आयोजन में आये पशुपालकों से बातचीत करके इस व्यवसाय की बारीकियों को जाना, तो पता चला कि पशुपालन में केवल मुनाफा ही मुनाफ है और नुकसान की संभावना ना के बराबर है। इस आयोजन में पूरे हरियाणा से भैंस, सांड, गाय, बैल, घोड़ा, शुकर, ऊंट, भेड, बकरी और मींढे पालने वाले पशुपालक आए हुए हैं। इन पशुपालकों में अनपढ़ और स्कूल पढ़ाई कर रहे युवकों सहित एमबीए कर रहे लोग भी शामिल हैं। इन लोगों में पशुओं की ब्रिडिंग करने वालों की भी कोई कमी नहीं है।

to day news in chandigarhआयोजन में आए पशु भी किसी लिहाज़ से कम नहीं हैं। इन पशुओं की किमत सुनकर अच्छे-अच्छों को झटका लग सकता है। पानीपत जिला के डिडवाडी गांव के सांड की 25 करोड़ कीमत लग चुकी है। फरीदाबाद में हुए कृषि सम्मेलन से कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश के पशुपालक वी राजू ने इस शहंशाह नाम के सांड पर 25 करोड़ रूपए लगा दिए थे। खास बात यह है कि लगभग साढे चार साल के शहंशाह को पालने वालों में एमबीए कर रहा नवीन नाम का युवक भी शामिल है, जो अपने पिता सुरेन्द्र सिंह का पशुपालन में हाथ बंटाता है। नवीन ने बातचीत के दौरान बताया कि शहंशाह के सिमन से प्रतिमाह लगभग ढेड लाख रूपए कमा लेते हैं। नवीन और उनका परिवार भैंस और सांड पालते हैं। उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले अब पशुपालन में काफी बदलाव आया है और इसमें अब तकनीक भी प्रयोग होने लगी हैं। सरकार पशुपालन के लिए लोगों को प्रोत्साहन देने लगी है। ग्रामीण विकास मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने पशुपालकों के लिए अहम कदम उठाए हैं।

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सूकरपालन भी लोगों को अब आकर्षित करने लगा है और लोग इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं। झज्जर जिला के बीड़ गांव के रहने वाले धीरेन्द्र गहलोत विदेशों तक सूकरों की सप्लाई करतें है। बारहवी तक पढे़ धीरेन्द्र ने बताया कि लगभग 10 साल पहले उन्होंने सूकरपालन शुरू किया था और आज वे प्रतिमाह 1 लाख रूपए के करीब कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूकरपालन लगभग 200 गज ज़मीन पर भी शुरू किया जा सकता है और इसके लिए सरकार की ओर से अनुदान भी मिलता है। उन्होंने 2009 में बरेली के इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीच्यूट से प्रशिक्षण लेकर काम शुरू किया था और अब सरकार की ओर से हर महीने चिकित्सक भी उनके फार्म पर आकर सूकरों की जांच करते हैं। इस व्यावसाय में मार्केटिंग की भी जरूरत नहीं होती है। ग्राहक अपने आप फार्म पर आकर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की सोच है कि हरियाणा दूसरे क्षेत्र के साथ साथ पशुपालन में भी देश का अग्रणी राज्य हो, जिसके लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं।

बहादुरगढ़ के बामड़ोली गांव के अमित के नुकरा नस्ल के लगभग 22 महीने के घोड़े के बच्चे की सुंदरता को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है। सफद रंग का यह बच्चा देखने लायक है और अमित ने इसको 11 लाख रूपए में खरीदा था, जिसपर अब 37 लाख रूपए लग चुके हैं। अमित खुद स्नातक हैं और लगभग दस साल से उनका परिवार पशुपालन के व्यवसाय में है। महेन्द्रगढ़ के खायरा गांव के कंवरपाल घोड़े की ब्रीडिंग का काम करते हैं और उनकी घोड़ी वीरा जयपुर शो में पहला इनाम जीत चुकी है और उसकी 31 लाख रूपए कीमत लग चुकी है। कंवरपाल भी स्नातक हैं और कई सालों से इस व्यवसाय में हैं। अमित और कंवरपाल ने बताया कि घोड़ापालन बहुत अधिक फायदे का सौदा बनता जा रहा है और अब सरकार भी इसके लिए प्रोत्साहन देने लगी है जोकि सराहनीय काम है। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा पशुपालकों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

ईमलोटा के गायपालक अशोक कलकल भी पशुपालन के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। उनके पास गीर नस्ल की बेहतरीन गाय हैं। ईमलोटा गांव में गौकरण गौ संवर्धन के नाम से डेयरी भी चलाते हैं। लगभग 5 साल पहले पशुपालन व्यवसाय में आए अशोक कलकल इससे पहले स्टोन क्रेशर का व्यवसाय भी कर चुके हैं और एलएलबी स्नातक हैं। अशोक बताते हैं कि उनकी गीर नस्ल की गाय 25 किलो दूध देती हैं और वे इस व्यवसाय से प्रतिमाह 1 से डेढ़ लाख रूपए कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विशेषकर ग्रामीण विकास मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने पशुपालन को बढावा देने के लिए जो कमद उठाए हैं, उनसे वास्तव में पशुपालन की ओर लोगों का रूझान बढा हैं और पशुपालकों की हालत में भी सुधार आया है।

पशुधन प्रदर्शनी में भेड़ बकरी और मींढे पालने वाले लोग भी हैं, जो बताते हैं कि उनका पूरा परिवार ही इस व्यवसाय में है और सालाना 3 लाख रूपए से भी अधिक कमाई हो जाती है। सिरसा जिला के सहुवाल गांव के रामपाल अपने बेटे अमरपाल के साथ प्रदर्शनी में आए हैं। अमरपाल 11वी कक्षा में पढ़ता है और इस व्यवसाय में परिवार का हाथ भी बंटाता है। रामपाल बताते हैं कि बिल्लू नाम के उनके मींड़े की कीमत 40 हजार रूपए है और इसे वे केवल बी्रडिंग के लिए  ही प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने किसानों सहित पशुपालकों के लिए अहम कार्य किए हैं, जिनके कारण आज लोग पशुपालन को अपना रहे हैं।