पंजाब स्टेट एलेक्ट्र्सिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) ने बढई बिजली की दरे, पंजाब सरकार को देना है 2900 करोड़ का बकाया,

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आई 1 न्यूज़ चैनल पूनम 23 – अक्टूबर – 2017  पंजाब स्टेट एलेक्ट्र्सिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) ने बढई बिजली की दरे, पंजाब सरकार को देना है 2900 करोड़ का बकाया, पंजाब स्टेट एलेक्ट्र्सिटी रेगुलेटरी कमीशन ने बढ़ाए बिजली दरों के दाम,सरकार पर भी बढ़ेगा बोझ ,सरकार की तरफ है विभाग का 2900 करोड़ का बकाया, कृषि क्षेत्र में सब्सिडी के चलते 6000 करोड़-अनुसूचित जाती सब्सिडी 2000 करोड़ का सरकार पर बढ़ेगा बोझ

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आम लोगों पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा तो साथ ही सरकर पर भी दरों के साथ दी जाने वाली सब्सिडी के चलते करोड़ों का बोझ बढ़ता दिखाई देगा हालाँकि इंडस्ट्री को लेकर जिस तरह से दरों में बढ़ोतरी की गई है उसमें सरकार बड़ी दरों की पूर्ति करेगी लेकिन इंडस्ट्री को कुछ टेरिफ छोड़ सर्कार की पॉलिसी के तहत बिजली उपलब्ध होगी.

चुनाव के समय सरकार ने लोगों को बिजली दरों का नहीं बढ़ने देने की बातें कहीं तो आज PSERC का एलान हुआ उसमें हर किसी पर बोझ बढ़ता हुआ दिखाई देता क्योंकि घरेलू खपत में सीधा असर आम जनता पर होगा .विभाग ने दरें बढ़ाने के पीछे कारन बताते हुए कहा की 2017-18 का कुल घाटा 2522.62 करोड़ निर्धारित किया था की जबकि ये घाटा 11575.53 करोड़ सामने आया जिसके चलते आज बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है.जिसमें दरों की बढ़ोतरी में 9.33% की बढ़ोतरी की गई है.to day news in chandigarh

घरेलू दरों में पहले 100 यूनिट के लिए 46 पैसे 101-103 यूनिट तक 41 पैसे 301-500 तक 59 पैसे मूल्य तय किया गया है और जिनके पास 50 किलोवाट से 100 किलोवाट का लोड है उनके लिए 80 पैसे बढ़ाए गए है और 100 किलोवाट से जायदा लोध वालों के लिए भी 80 पैसे मूल्य निर्धारित रहेगा.

Bite:PSERC

इंडस्ट्री के लिए दिए जा रही सप्लाई को देखते हुए भी अलग अलग टेरिफ के चलते दरों में बढ़ोतरी की गई है लेकिन सरकार ने जिस तरह से इंडस्ट्री के लिए सस्ती बिजली दर देने की बात कही गई है उसमे सरकार उन दरों को खुद विभाग को सब्सिडी दे गी यानि की इंडस्ट्री के लिए दरों का ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला लेकिन घरेलू खपतकारों के लिए जरूर बिजली दरों के बढ़ने के चलते बिजली महंगी होने जा रही है .

Bite PSERC

बढ़ाई गई बिजली दरों के चलते सरकर पर भी कृषि सब्सिडी हो या फिर अनुसूचित जाती श्रेणिओं को दी जा रही सब्सिडी हो उसके चलते वार्षिक वित्त बोझ बढ़ने वाला है जोकि करीब 10900 करोड़ होगा |

 

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