तेज रफ्तार के चलते पंजाब की सड़के पिछले काफी समय से बड़े सड़क हादसों का सबब बनती जा रही है।

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ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट तेज रफ्तार के चलते पंजाब की सड़के पिछले काफी समय से बड़े सड़क हादसों का सबब बनती जा रही है। पिछले 10 साल के आंकड़ों की अगर बात करे तो इन सड़क हादसों की वजह से पंजाब में मरने वालों की संख्या करीब 40 हजार के आसपास है। पिछले एक साल में अकेले लुधियाना में सड़क हादसों से मरने वालों की संख्या 384 के आसपास है जो देश का सबसे बड़ा रेशो है लेकिन इस सब के बावजूद सूबा सरकार सड़क हादसों पर अंकुश लगाने को लेकर कोई प्रभावी कदम उठाती नजर नहीं आ रही है । हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से स्पीड गवर्नेस प्रणाली को अपनाने के दिशा निर्देश भी जारी किये थे। पंजाब की पूर्व शिरोमणि अकालीदल भाजपा सरकार ने 2015 में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर यह भी कहा था कि पंजाब में कमर्शल गाड़ियों पर इस प्रणाली को लागू किया जायेगा लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य डॉ कमलजीत सोई का कहना था कि अगर प्रदेश में कमर्शल गाड़ियों के ऊपर स्पीड गवर्नेस प्रणाली लागू हो जाती है तो सड़क हादसों में कुछ कमी आ सकती है। सोई का कहना था कि इसको लेकर उन्होंने कई बार पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिलने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाए । वही सोई ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वह सरकार को 3 हफ्ते का समय देते है इस प्रणाली को लागू करने को लेकर अगर फिर भी सरकार इस प्रणाली को लागू नहीं करती तो वह कोर्ट में सरकार में खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर करेंगे ।

बाइट राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य डॉ कमलजीत सोई

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