पीयू के छात्र संघ चुनाव में नहीं आ रहे राजनितिक दलों के बड़े नेता

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ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट पीयू के छात्र संघ चुनाव में नहीं आ रहे राजनितिक दलों के बड़े नेता , छात्र संघो को खुद की काबलियत दिखने का मौका या फिर छात्र संघ चुनाव से मोहभंग ? छात्र संघो का दावा अपने दम पर जीतेंगे चुनाव ,छात्र संघों का दावा छात्र राजनीती परे देश की राजनीती ,मेनिफेस्टो जारी कर छात्र संघो के बड़े दावे ,सभी छात्र संघ की भाषा अलग पर मुद्दे एक ,यूनिवर्स्टी प्रशासन भी तयारी में जुटा पीयू के छात्र संघ चुनाव में समय कम रहा है तो वहीँ छात्र संघो की तयारी भी बड्ड स्तर पर कम समय में देखने को मिल रही है हालाँकि इस बार राजनितिक दलों से जुड़े छात्र संघों में उनके बड़े नेता इसमें शामिल होते नहीं नजर आ रहे जिसमे छात्र संघ अपने दम पर जितने की बात कह रहे हैं तो वहीँ मेनिफेस्टो रिलीज कर छात्र संघ बड़े दावे कर रहे हैं जिससे छात्रों की मांगो को पूरा किया जायेगा  पीयू के चुनाव में छात्र संघो की तयारी देख व् देश की राजनीती में अहम स्थान किस तरह रहता है उसमे समझा जा सकता है की देश की राजनीती में बड़े मंत्री पद पर मौजूद नेता पीयू छात्र संघ की राजनीती में से निकल आगे बड़े हैं लेकिन इस बार के छात्र संघ चुनाव में राजनितिक पार्टियों से जुड़े छात्र संघो  के चुनाव प्रचार के लिए कोई भी बड़ा राजेनता चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुँच रहा जिसमे छात्र संघो का दावा की वो अपने दम पर इस बार के चुनाव जीतेंगे जिसमे छात्रों के मुद्दों को उठाया जा रहा है जिसमे हॉस्टल,लड़किओं की सुरक्षा ,लाइब्रेरी की व्यवस्थता इत्यादि मुद्दे शामिल है .
Bite:निर्योग मान (एनएसयूआई)
एबीवीपी की माने तो एबीवीपी भी अपने दम पर चुनाव जितने का दावा कर रही है जिसमे अपने मेनिफेस्टो को एबीवीपी छात्रों के पक्ष बताते हुए वोट मांग रही है और साथ ही उनका साफ़ कहना है की छात्रों की बात के बीच में बड़े नेता आये या नहीं उसमे चुनावो के बीच किसी तरह का फर्क नहीं पड़ता है.
Bite:कृष्ण कुमार (एबीवीपी)
एसओआई बड़े नेताओं के नहीं आने को सही मानते हुए छात्र संघ की राजनीती को अलग रख कर सही मानती है जिसमे एसओआई का तर्क है की छात्र संघ खुद छात्रों की समस्या सुन हल करवाने का दावा करती है तो उसमे बड़े नेता आये या नहीं मायने नहीं रखता यहाँ तक एसओआई का यहाँ तक कहना है की अच्छा माहौल बनता है जब सिर्फ कैम्पस के ही छात्र नेता अपने नेताओं को चुनते हैं.
Bite:प्रभजोत सिंह (एसओआई)
बड़े नेताओं का नहीं आना छात्र संघो के अपने तर्क है जिसमे देखा जा सकता है की बड़े करने में देखें तो छात्र संघो के दावे आम चुनावो में बड़े रहते हैं और अब जब बरी छात्र संघ की खुदकी आई है तो हो सकता है राजनितिक दल भी यही चाहते हैं की छात्र संघ की खुस की पकड़ छात्रों के बीच कितनी है वो दिखने का मौका बन सके और दूसरी तरफ से भी सोचा जा सकता है की कहीं न कहीं राजनितिक दल छात्रों से दुरी बनाते हुए नजर आ रहे हैं.

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