दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा हाईकोर्ट में रिव्यु पिटीशन दायर कर आशुतोष महाराज के कथित पुत्र दलीप कुमार झा को महाराज के डी.एन.ए. की मांग पर दी गई छूट के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने का जो अधिकार माँगा गया था, उसे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज दिया है।

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 ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट  दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा हाईकोर्ट में रिव्यु पिटीशन दायर कर आशुतोष महाराज के कथित पुत्र दलीप कुमार झा को महाराज के डी.एन.ए. की मांग पर दी गई छूट के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने का जो अधिकार माँगा गया था, उसे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज दिया है। जस्टिस महेश ग्रोवर एवं जस्टिस शखर धवन की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि, महाराज के शरीर पर संस्थान का अधिकार नहीं है, संस्थान के पास महाराज के शरीर को संरक्षित करने का अधिकार है और हाईकोर्ट इस मामले में झा के कानूनी अधिकार से उसे वंचित नहीं कर सकता है और नहीं उसमे दखल देना चाहते हैं, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अगर संस्थान को कोई आपत्ति है तो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
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संस्थान ने अपनी अर्जी में कहा था कि हाई कोर्ट के फैसले में विरोधाभास है क्योंकि एक ओर तो हाईकोर्ट ने ही झा द्वारा डी.एन.ए. टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया था। लेकिन वहीँ दूसरी ओर उसे इस मांग को लेकर सिविल कोर्ट में जाने की छूट दे दी थी और इतना ही नहीं अपने फैसले में हाईकोर्ट ने संस्थान को भी निर्देश दिए थे की अगर सिविल कोर्ट इस मामले में महाराज के डी.एन.ए. के आदेश देता है तो संस्थान इसमें आपत्ति नहीं करेगा। संस्थान के अनुसार इस पर आपत्ति करने का संस्थान को अधिकार दिया जाये। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
बता दें कि, हाईकोर्ट ने 5 जुलाई को इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा था कि, वो संस्थान के धार्मिक मामले में दखल देना नहीं चाहती है। लिहाजा हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच द्वारा महाराज के शरीर के अंतिम संस्कार के जो आदेश दिए थे, उन आदेशों को रद्द करते हुए संस्थान को महाराज के शरीर को संरक्षित रखे जाने के आदेश दे दिए थे। लेकिन महाराज के कथित पुत्र दलीप कुमार झा की डी.एन.ए. टेस्ट की मांग को खारिज करते हुए उसे इन मांग को लेकर सिविल सूट दायर करने के आदेश दे दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संस्थान को आदेश दिए हैं की अगर निचली अदालत महाराज के डी.एन.ए. टेस्ट के आदेश दे तो संस्थान इसमें किसी भी किस्म की कोई रूकावट नहीं पैदा करेगा। दिलीप कुमार झा के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के खिलाफ ही संस्थान ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। जिसे खारिज कर दिया गया है।

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