बेटी की शादी के 1 महीने के भीतर दामाद सहित दूर-पास के तमाम ससुरालियों पर बिना मौका-बिना तफ्तीश 17 धाराओं में 3-3 झूठी एफआईआर

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ऑय 1 न्यूज़  आर पी सिंह चंडीगढ़ बेटी की शादी के 1 महीने के भीतर दामाद सहित दूर-पास के तमाम ससुरालियों पर बिना मौका-बिना तफ्तीश 17 धाराओं में 3-3 झूठी एफआईआर शादी बनी बर्बादी वाली कहावत तरनदीप सिंह बावा के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठती है। उनकी शादी 25 नवंबर 2013 को बड़े धूमधाम से फिरोजपुर के एक उद्योगपति वीरेंद्रपाल सिंह की बेटी अमनदीप कौर के साथ हुई थी, परंतु दुर्भाग्यवश चंद महीनों में ही नवविवाहित जोड़े में विवाद इतना बढ़ गया कि बात पुलिस स्टेशन तक पहुंच गई और इसके बाद शुरू हो गया केस दर केस दर्ज होने का सिलसिला। चंडीगढ़ के सेक्टर 10 निवासी तरनदीप सिंह बावा का कहना है कि उनके ससुर वीरेंद्रपाल सिंह अपने क्षेत्र के बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं व उनका कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों व अन्य महत्वपूर्ण लोगों के साथ उठना बैठना है जिसका वह पूरा पूरा उपयोग करके हमें एक के बाद एक केस में उलझाने में लगे हुए हैं। पीडि़त का कहना है कि शादी के बाद उनकी अपनी पत्नी के साथ कुछ गलतफहमी पैदा हो गई जिससे 28 जनवरी 2014 को सदर फिरोजपुर थाना में उनके व उनके परिवारजनों जिनमें तरनदीप के पिता सुखिंदर सिंह, माता सुखविंदर कौर, दो विवाहित बहनों व उनके पतियों प्रीतकमल एवं उनके पति रूपन चावला तथा रमनदीप व उनके पति डा. रमीत के साथ साथ रमनदीप कौर की सास श्रीमती सुरेंद्र कौर सोढ़ी एवं तरनदीप के ड्राइवर रोबिन सिंह के खिलाफ धारा 307, 406, 498-ए, 342 व 506 के तहत मामला दर्ज करवा दिए गए। तरनदीप ने आरोप लगाया कि यह मामला किसी उचित पूछताछ अथवा सुलह सफाई का मौका दिए बिना ही दर्ज कर लिया गया। तत्पश्चात 16 अप्रैल 2014 को उक्त सभी के साथ साथ तरनदीप के क•ान व पांच अन्य के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज करा दी गई जो धारा 384, 115, 506, 120-बी के अलावा आम्र्स एक्ट की धारा 25/54/59 के तहत दर्ज कर ली गई। इसमें आरोप लगाया गया कि तरनदीप व उनके परिवारिक सदस्यों ने वीरेंदर पाल सिंह की हत्या के लिए षडयंत्र रचकर सुपारी दी है। तरनदीप के मुताबिक उनके ससुरालियों ने यही पर बस नहीं कि बल्कि दहेज के सामान की सूची में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए लगभग दो महीने बाद यानी 18 जून 2014 को एक और एफआईआर धारा 420, 465, 467, 468, 470, 471 व 120-बी के अंतर्गत उपरोक्त सभी के खिलाफ दर्ज करा दी गई।
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तरनदीप ने आरोप लगाया कि जहां एक आम आदमी को एफआईआर दर्ज कराने पर जूते घिस जाते हैं वहीं इस पति-पत्नी के सामान्य से गलतफहमी के मामले में एक के बाद एक एफआईआर इस प्रकार धड़ल्ले से दर्ज हुई जैसे कि उनका सारा परिवार अपराधियों का परिवार हो। तरनदीप ने इस मामले को लेकर यहां एक पत्रकारवार्ता में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि जहां पुलिस पेशेवर अपराधियों के साथ बेहद नरमी से पेश आती है वहीं उन्हें और उनके परिवारजनों से काफी कड़ाई से पूछताछ की गई क्योंकि वीरेंद्र पाल सिंह एक बेहद प्रभावशाली व समर्थ व्यक्ति हैं और उनके कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ साथ राज्य के कई वीआईपी लोगों के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने इसी का फायदा उठाते हुए मेरे पूरे परिवार को पुलिस केसों में उलझा कर रख दिया। उन्होंने बताया कि उनकी शादी में भी लडक़ी वालों की तरफ कई रसूखदार लोग शामिल हुए थे व फोटो भी खिंचवाईं थी। इनमें तत्कालीन अकाली सरकार में कैबिनेट मंत्री जनमेजा सिंह सेखों भी शामिल थे। तरनदीप के मुताबिक जब उनके खिलाफ उपरोक्त केस मामले दर्ज हुए तो उस समय के टेलीफोन रिकार्ड अगर खंगाले जाएं तो साफ सामने आएगा कि वीरेंद्र पाल ंिसह विभिन्न पुलिस अधिकारियों के संपर्क में थे।
तरनदीप ने कहा कि यहां तक कि फिरोजपुर में दो वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के साथ भी वीरेंद्र पाल सिंह संपर्क मे थे जिस कारण उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रायल को ट्रांसफर करने के लिए आवेदन करना पड़ा जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के आदेश किए परंतु फिर भी स्थानीय पुलिस इस मामले में उनके सारे परिवार को प्रताडि़़त करती रही। जिस पर आखिरकार उच्च न्यायालय को कड़ी टिप्पणी करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि हालांकि मामला न्याययिक दायरे में आ गया था परंतु फिर भी पंजाब पुलिस ने दखलअंदाजी बंद नहीं की और यहां तक कि एसआईटी के चेयरमैन व पटियाला के पुलिस प्रमुख अमरसिंह चहल ने भी जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की उसमें भी झूठे तथ्य व दस्तावेज लगाए गए जो पहले कभी नहीं थे। तरनदीप ने चहल पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास चहल व वीरेंद्र पाल सिंह के बीच टेलीफोन पर हुई लंबी बातचीत से संबंधित दस्तावेज हैं।
तरनदीप ने आरोप लगाा कि इस मामले में नियुक्त नए एसआईटी, चेयरमैन एसपीएस परमार, आईजी साईबर क्राईम मोहाली भी वीपी सिंह के करीबी हैं। तरनदीप ने कहा कि यह सारा मामला पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण ढंग से व एकतरफा जांच का अनुपम उदाहरण है जिसकी गहराई में जाने से पता चलता है कि वीरेंद्रपाल सिंह ने उनके सारे परिवार से बदला लेने के लिए व सभी प्रकार से अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपनी अंतरात्मा को ताक पर रखकर वीरेंद्रपाल सिंह के किन्हीं एहसानों को चुकाने व उनकी ईगो को शांत करने के लिए अपनी कर्तव्यपरायणता एवं आम जनता व पीडि़तों को न्याय दिलाने की अपनी मूल जिम्मेदारी को भुला दिया। तरनदीप के मुताबिक चहल की चेयरमैनशिप में गठित एसआईटी ने उनके खिलाफ 16 अप्रैल एवं 18 अप्रैल 2014 को सप्लीमेंटरी चलान भी फाइल कर दिए। तरनदीप ने जोर देकर गुहार लगाई कि उनके व उनके परिवारवालों के साथ इस पूरे मामले में अन्याय हुआ है व उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई उन्होंने मांग की कि इस सारे मामले को सीबीआई, ईडी या हाईकोर्ट के जज को सौंपा जाए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके क्योंकि मौजूदा हालातों में न्याय मिल पाना मुश्किल ही नहीं असंभव है।

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