राजमाता एक प्रगतिशील महिला थी, जो अपने बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षा चाहती  थी

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राजमाता एक प्रगतिशील महिला थी, जो अपने बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ शिक्षा चाहती  थी
ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट चंडीगढ़, 24 जुलाई स्वर्गीय राजमाता मोहिंदर कौर एक प्रगतिशील महिला थीं, जिन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा पर बहुत महत्व दिया था।
खुशवंत सिंह द्वारा लिखित कैप्टन अमरिंदर की अधिकृत जीवनी – द पीपल्स महाराजा -में स्वर्गीय राजमाता के कथन, ‘यह महाराजा और मेरी इच्छा थी कि हमारे बच्चे सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्राप्त करें।’ का वर्णन किया है। वह कैप्टन अमरिंदर की ओर इशारा करते हुए आगे कहती हैं, ‘मुझे यह महत्वपूर्ण लगा था कि युवराज के लिए जल्द से जल्द एक बोर्डिंग स्कूल जायें , उनकी बहने पहले से ही बोर्डिंग में थी और उन्हें घर पर अकेलापन महसूस होता होगा। वास्तव में, मेरे छोटे पुत्र मालविंदर अमरिंदर की तुलना में छोटी उम्र में ही बोर्डिंग में चले गये थे। सभी बच्चों के जाने के बाद, वह घर पर सामांजस्य नहीं कर पर रहे थे। ’
राजमाता और महाराजा दोनों ने यह महसूस करते थे कि शिक्षा न केवल विकास और प्रगति के लिए, बल्कि किसी के चरित्र के निर्माण और मूल्यों का आत्मसात के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो कि जीवनभर साथ रहते हैं।
परोपकारी विचारधारा वाली राजमाता अनेक कई सामाजिक कार्यों में शामिल रहीं। आजादी के तुरंत बाद उन्होंने पेप्सू के लिए काम किया – एक ऐसा संगठन जिसने देश के विभाजन के बाद शरणार्थियों को भोजन और चिकित्सा सहायता की पेशकश की। 1964 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और 1967 में पहली बार संसद में चुने गए।
1971 में उनके पति क ो नीदरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किये जाने के उपरांत परिवार नींदरलैंड पलायन कर गया। अपने पति की मौत के बाद वह पटियाला लौट आई और तब से अपने मोती बाग पैलेस में रह रही थीं। इस दौरान उन्होंने अपना जीवन सामाजिक कार्यो को समर्पित रखा।

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