आज कल स्कुल बसों की एक्सीटेंडस की घटनाएं आम हो गई है इसका कारण अकसर ट्रासपोर्ट से जुडे शख्स की गलती होती है

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ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट आज कल स्कुल बसों की एक्सीटेंडस की घटनाएं आम हो गई है इसका कारण अकसर ट्रासपोर्ट से जुडे शख्स की गलती होती है या तो ड्राइवर बेपरवाह होता है या बस में पुरी फेस्ीलिटिस नही होती है। इसके लिए हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया था लेकिन फिर भी काफी ट्रासपोर्ट निर्देशों का पालन नही करते। चंडीगढ स्कुलों के प्रिसिंपल औऱ ट्रांसपोर्ट मैनेजरों को सेस्ीटाईज़ करने के लिए चंडीगढ कमिशन फार प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइडस दृारा एक प्रोगाम का आयोजन किया गया।

 

आज तक ज्यादा गिणती में बच्चे स्कुल बसों के ज़रिए स्कुल जाते है लेकिन मां बाप की जान अटकी रहती है जब तक बच्चे घर नही पहुंचते क्योकिं स्कुल बसों के एक्सीटेंड की खबरें आम हो गई है। जिसके चलते हाई कोर्ट ने कई निर्देश दिए औऱ स्कुलों औऱ ट्रांसपोर्ट को सेफ ट्रांसपोर्टेशन पालिसी फार स्टुडेंटस को फोलो करने के आदेश दिए। जिसके चलते बस में जी पी एस होना चाहिए, हर बस में सी सी टी वी कैमरा लगा होना चाहिए और सीटों पर ज्यादा बच्चें ना बिठाए जाए औऱ साथ ही महिला अटेंडटें का होना अनिवार्य किया। लेकिन अभी भी काफी स्कुल और ट्रांसपोर्ट इसे फोलो नही कर रहें।

जिसके चलते चंडीगढ कमिशन फार प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइडस की तरफ से एक प्रोगाम का आयोजन किया गया। जिसमें चंडीगढ के करीब 60 स्कुलों के प्रिंसिपल और 70 ट्रांसपोर्ट मैनेजरस ने हिस्सा लिया। इस दौरान कमिशन के अधिकारीयों के साथ साथ चंडीगढ ट्रेफिक पुलिस के डी एस पी और स्टेट ट्रांसपोर्ट एथोरिटी के अधिकारी भी मौजूद रहें।

बाइट : हरजिंदर कौर, चेयरपर्सन, सीसीपीसीआर

 

चाइल्ड राइट कमिशन की तरफ से सेफ्टी वीक भी बनाया गया था जिसमें स्कुलों की बसें चैक करके उनके चलान भी काटे गए। ट्रेफिक पुलिस के डी एस पी य़शपाल ने कहा कि एेसे वर्कशाप होना बहुत ज़रूरी है तांकि स्कुलों के प्रिंसिपल और ट्रांसपोर्ट मैनेजर को सेंसीटाइज़ किया जाए। उन्होने कहा कि स्कुलों की बसों के साथ साथ जो बच्चे बिना हेलमेट बाइक या स्कुटी चलाते है उन्हे चिलड्रन ट्रेफिक पार्क में जाकर में एेजुकेट किया जाता है।

बाइट : यशपाल, डीएसपी, ट्रैफिक

 

वहीं चंडीगढ स्टेट ट्रांसपोर्ट एथोरिटी के आफिसर राजिव तिवारी ने कहा कि चंडीगढ में स्कुल और ट्रांसपोर्टर हाई कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहें है या नही इसका पुख्ता ध्यान रखा जा रहा है औऱ चैकिंग भी की जा रही हैं। स्कुलों की मैनेजमेंट औऱ ट्रांसपोर्टस को भी अपनी रिस्पोस्ीबिलटी समझनी चाहिए।

बाइट : राजीव तिवारी, एसटीए अफसर

 

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