अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश न करे इनेलो: बराला इनेलो और कांगे्रस ने एसवाईएल के मसले पर राजनीतिक रोटियां सेंकी

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डीगढ़, 10 जुलाई  अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश न करे इनेलो: बराला इनेलो और कांगे्रस ने एसवाईएल के मसले पर राजनीतिक रोटियां सेंकी भाजपा सरकार के रूख को देखकर राजनीतिक जमीन खिसकने का डर है इनेलो को
चंएसवाईएल के मुद्दे पर पंजाब से हरियाणा आने वाले वाहनों का रास्ता रोकने के इनेलो के प्रयास पर कडी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने इनेलो को अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इनेलो का इतिहास पेड काटने, रास्ते रोकने और आमजन को परेशान करने का रहा है। आज इनेलो को लग रहा है कि एसवाईएल के मुद्दे पर भाजपा सरकार के बेहतर तरीके से पैरवी करने के कारण उनकराजनीतिक जमीन खिसक रही है। इसलिए इनेलो बौखलाहट में प्रदेश की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आज यहां जारी बयान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा कि पंजाब से हरियाणा में आने वाले वाहनों को रोकने की कोशिश करके इनेलो अपने इतिहास को दोहरा रही है। उन्होंने इनेलो को अराजकता फैलाने जैसे प्रयास करने से बाज आने की नसीहत देते हुए कहा कि एसवाईएल के मसले पर भाजपा सरकार न केवल अदालत, अपितु केंद्र स्तर पर भी हरियाणा के हितों की पैरवी बेहतर तरीके से कर रही है तो क्यों इनेलो हडबडाहट दिखा रही है। उन्होंने कहा कि एसवाईएल जैसे अति संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने की दिशा में ईमानदारी से सरकार के साथ एकजुट होकर प्रयास करने की बजाय इनेलो एक बार फिर से इस मुद्दे पर नौटंकी कर रही है। उन्होंने कहा कि इनेलो बार-बार एसवाईएल का मुद्दा उठाकर हरियाणा के किसानों की भावना से खिलवाड कर रही है। इनेलो के प्रयास को सर्कसी करतब करार देते हुए बराला ने कहा कि इनेलो ने हमेशा हरियाणा के हितों को दरकिनार करते हुए सदैव राजनीतिक रोटियां सेंकी है। चौटाला परिवार ने अपने पगड़ी बदल भाई बादल परिवार से दोस्ती निभाने के चक्कर में हरियाणा के हित गिरवी रखे।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के आवागमन में बाधा डालकर आज इनेलो जितनी छटपटाहट दिखा रही है, उतना इनेलो ने कभी एसवाईएल के मसले पर गंभीरता नहीं दिखाई। वर्ष 1977 में चौधरी देवीलाल ने मुख्यमंत्री बनते ही हरियाणा के हितों की बलि चढाकर एसवाईएल के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके बाद 1987 में एसवाईएल का पानी लाने के मुद्दे पर सत्ता में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय देवीलाल भी एसवाईएल का निर्माण कार्य रुकवाकर हरियाणा की जनता के साथ धोखा किया गया। वर्ष 1999 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने ओमप्रकाश चौटाला ने बयान दिया कि हम सर्वोच्च न्यायालय में हरियाणा द्वारा लगाई गई याचिका को वापस लेंगे तथा इस मसले पर बैठकर हल करेंगे। जबकि पंजाब मुख्यमंत्री बादल स्पष्ट कर चुके थे कि वह हरियाणा को एक बूंद भी पानी नहीं देंगे, ऐसे में बातचीत के कोई मायने नहीं थे। चौटाला जनदबाव के कारण याचिका वापस नहीं ले सके, अन्यथा वह बहुत पहले ही हरियाणा हित की तिलांजलि दे चुके होते। इसके बाद वर्ष 2002 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला देने के एक माह पूर्व भी दोनों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को बातचीत से मामले को सुलझाने के लिए कहा। लेकिन उस समय भी दोनों ओर से गंभीर प्रयास नहीं हुए। उन्होंने कहा कि चौटाला और बादल परिवार ने सत्ता में रहते हुए हमेशा हरियाणा के हिस्से के पानी को रोकने का ही प्रयास किया। एसवाईएल पर भाजपा सरकार द्वारा किए गए प्रयास पर बोलते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सुप्रीम कोर्ट में 12 साल से लंबित चल रहे पे्रजिडेंशियल रेफरेंस की गंभीरता से पैरवी की, जिसपर 29 फरवरी 2016 से 12 मई 2016 तक नियमित सुनवाई हुई और अदालत ने  पंजाब के द्वारा वर्ष 2004 में बनाए समझौता निरस्तीकरण अधिनियम 2004 को असंवैधानिक करार दिया और 10 नवम्बर 2016 को माननीय सर्वोच्य न्यायालय ने प्रेजिडेशियल रेफरेंस पर हरियाणा के पक्ष में फैसला दिया। आज इनेलो को हरियाणा में अपनी राजनीतिक जमीन गुम होती नजर आ रही है, इसलिए वह बौखलाहट में प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार हरियाणा की ढाई करोड़ जनता के हितो की रक्षा करने के लिए बेहतर कदम उठा रही है। इसलिए इनेलो धैर्य रखते हुए प्रदेश की जनता की भलाई की दिशा में भाजपा सरकार के कदमों पर एकजुटता दिखाए, तभी जनता महसूस करेगी कि इनेलो एसवाईएल पर गंभीर है।

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