प्रधानमंत्री आवास योजना मलोया में 10 हजार फ्लैट्स बनाने की केंद्र ने दी मंजूरी सरकर ने

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ऑय 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट 06-07-2017 चंडीगढ़
प्रधानमंत्री आवास योजना मलोया में 10 हजार फ्लैट्स बनाने की केंद्र ने दी मंजूरी सरकर ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चंडीगढ़ प्रशासन पहले फेज में करीब 10 हजार फ्लैट्स बनाएगा। आवासीय योजना को लेकर दिल्ली में आयोजित सेक्रेटरी लेवल की बैठक में यूटी प्रशासन की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया, इस पर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी। बैठक में मौजूद प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने आवास और शहरी गरीबी उपशमन केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू के समक्ष हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट पर अपनी प्रजेंटेशन दी। जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन ने अगस्त माह से आवासीय योजना के तहत 10 हजार फ्लैट्स के निर्माण का प्रस्ताव रखा।

अधिकारियों ने बताया कि आवासीय योजना के लिए जगह तय कर ली गई है। मलोया में पहले चरण में 10 हजार फ्लैट्स का निर्माण किया जाएगा। इनमें ईडब्लयूएस कैटेगरी के तहत 3500 फ्लैट, एलआईजी के तहत 3000, एमआईजी-1 के दो हजार और एमआईजी-2 के तहत 1500 फ्लैट बनाए जाएंगे।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के पास फ्लैट के लिए कुल एक लाख 22 हजार 899 आवेदन आ चुके हैं। सीएचबी चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस का कहना है कि इस योजना के तहत ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी-1 और 2 कैटेगरी के फ्लैट्स के लिए आवेदन मांगे गए थे।

बैंस ने बताया कि अगले माह से निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके लिए केंद्र से भी मंजूरी मिल चुकी है। पहले फेज में कौन सी कैटेगरी के तहत कितने फ्लैट्स का निर्माण किया जाएगा। प्रशासन की ओर से केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दे दी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मांगे गए आवेदन में 36 हजार 382 आवेदन मैनुअल, 40 हजार 524 ऑनलाइन और 45 हजार 993 ई संपर्क केंद्र के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। प्रशासन की ओर से वर्ष 2021 तक चंडीगढ़ के इन डेढ़ लाख लोगों को अपना घर मुहैया कराने की योजना है। शहर के कौन से हिस्से में कितनी जमीन खाली पड़ी है।

इस पर प्रशासन की ओर से रिपोर्ट तैयार कर गृह मंत्रालय को भेज दी गई है। प्रशासन को गृह मंत्रालय ने पहले ही अवगत करा दिया है कि शहर में मार्केट रेट से कम किसी को भी जमीन अलॉट नहीं की जा सकती और जमीन नीलामी के जरिए ही दी जाएगी। मंत्रालय की ओर से जमीन अधिग्रहण पर पहले ही रोक लगाया जा चुका है। प्रशासन के पास शहर में लगभग 700 एकड़ जमीन है। इसमें से 300 एकड़ जमीन विभिन्न प्रोजेक्टों के लिए थी।

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