कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बैठक की

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नई दिल्ली: 22 मार्च अमित सेठी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बैठक की
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने संकट में घिरे और कर्जे में डूबे राज्य के किसानों के यकमुश्त ऋृण माफी के लिये केंद्र सरकार से विशेष पैकेज़ की मांग की है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह अपील बुधवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बैठक के दौरान की। बाद में पत्रकारों से बात करते हुये मुख्यमंत्री ने इस बैठक को एक शिष्टाचार मुलाकात बताया जिसमें किसानों के कर्जे माफ करने के मुद्दे संबधी भी विचार विमर्श किया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि चाहे उन्होंने केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की है परंतु फिर भी उनकी सरकार राज्य के किसानों का कर्जा माफ करने के लिये वचनबद्ध है और इसके लिये सरकार द्वारा पहले ही समयबद्ध प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्यमंत्री मंडल ने अपनी पहली बैठक में कांग्रेस घोषणा पत्र अनुसार किसानों के कर्जे माफ करने के लिये आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये हैं। हाल ही में राज्य में किसानों की आत्महत्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कर्जे की जकड़ से पंजाब के किसानों को बाहर निकालने के लिये श्री मोदी को विशेष पैकेज़ की घोषणा की विनती की है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा कि किसानों पर बढ़ रहे कर्जे के बोझ ने राज्य में कृषि क्षेत्र को क्षति पहुंचाई है। इसमें ना केवल देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाला है बल्कि इसने इस नाज़ुक सीमावर्ती राज्य की सामाजिक गांठों को भी चोट लगाई है। उन्होंने कहा कि अनाज उत्पादन में पंजाब ने अग्रणीय भूमिका निभाई है और देश के अनाज भंडार को सुरक्षित बनाया है। प्रधानमंत्री को दिये पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पर कुल कृषि ऋृण 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक जिसमें सहकारी क्षेत्र का 12500 करोड़ रुपये का भी फसली ऋृण शामिल है। पंजाब में फसली ऋृण प्रति किसानी परिवार पर औसतन 8 लाख रुपये का ऋृण है। राज्य के छोटे और मध्यम किसानों पर प्रति हेक्टयर ऋृण भारत में सबसे अधिक है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दुख व्यक्त करते हुये कहा कि स्थिति इतनी बद्ततर हो चुकी है कि कुछ किसान अपना कर्जा ना लौटाने के निकलने वाले सामाजिक एवं नैतिक निष्कर्षो से बचने के लिये खुदकुशी कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थागत स्त्रोतों के ऋृण मध्यम एवं छोटे किसानों को अति आवश्यक राहत देने से असमर्थ हैं जबकि राज्य में बढ़ रहे खेती संकट से निपटने के लिये केंद्रीय कृषि नीतियों की समीक्षा करने की आवश्यकता है।

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