पीयू में छाया आर्थिक संकटपीयू के पास नहीं है कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे करीब 1 हजार कर्मचारियों और छात्रों ने किया यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन

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चंडीगढ़ 12  दिसम्बर अमित सेठी  पीयू में छाया आर्थिक संकटपीयू के पास नहीं है कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसेकरीब 1 हजार कर्मचारियों और छात्रों ने किया यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन चंडीगढ़- पीयू में जारी आर्थिक संकट के विरोध में पीयू के टीचर्स और नॉन टीचर्स एसोसिएशन के साथ साथ छात्रों ने भी एक विरोध प्रदर्शन किया। और सरकार और यूजीसी से मांग की कि वे यूनिवर्सिटी को प्रयाप्त ग्रांट मुहैया कराएं। पीयू टीचर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रोफेसर प्रोमिला पाठक ने कहा कि भारत की बेहतरीन यूनिवर्सिटीयों में शुमार चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी आज गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रही है। यूनिवर्सिटी के पास टीचर्स और अन्य कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए फंड नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में ना सरकार कुछ कर रही है और ना ही यूजीसी इसका कोई हल निकाल रही है। इसलिए हमने यूनिवर्सिटी की सभी एसोसिएशनों को इक्कठा कर एक ज्यॉंएंट एक्शन कमेटी बनाई और  इस समस्या के विरोध में प्रदर्शन किया है। अगर इस समस्या का जल्द ही कोई सामाधान नहीं किया गया तो यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के आगे रोजी रोटी का सवाल खड़ा हो जाएगा।क्या है फंड की समस्याप्रोफेसर प्रोमिला ने बताया कि साल 2016-17 के लिए यूनिवर्सिटी का कुल खर्चा 502 करोड़ रुपए है। जिसमें से 250 करोड़ रुपए यूनिवर्सिटी खुद अपने पास से देती है। 20 करोड़ रुपए पंजाब सरकार की ओर आते। इस हिसाब से बाकी बची राशि यूजीसी को ग्रांट के तौर पर देने चाहिए। यहीं से फंड की समस्या शुरु होती है। उन्होंने कहा कि पीयू को एमएचआरडी यूजीसी की ओर से हर साल 176 करोड़ रुपए की ग्रांट आती है जिसमें से 132 करोड़ की पहली किस्त आ चुकी है। और बाकी बचे 44 करोड़ रुपए आने फरवरी तक आने की उम्मीद है। यूनिवर्सिटी का अपना फंड समाप्त हो चुका है। ऐसे में ये बचे हुए 44 करोड़ रुपए आ भी जाते है तो यूनिवर्सिटी ज्यादा से ज्यादा एक महीने का खर्चा ही वहन कर पाएगी। उसके बाद क्या होगा ये कोई नहीं जानता।
प्रोफेसर प्रोमिला ने कहा कि एमएचआरडी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमने यूजीसी को सभी जरुरी दिशा निर्देश दे रखे हैं। पीयू में इस तरह का कोई संकट नहीं आएगा मगर यूजीसी ने कहा कि वे अपनी तरफ से और कोई फंड नहीं दे सकते। उनका किरदार तो एक पोस्टमैन का है । वे तो पीयू की मांग को सिर्फ सरकार तक पहुंचा सकते हैं। इसके बाद कुछ दिनों पहले वीसी प्रोफेसर अरुण कुमार ग्रोवर ने कहा कि जनवरी के बाद यूनिवर्सिटी को ताला भी लग सकता है।  जिससे साफ होता है कि समस्या कितनी गंभीर है।इस प्रदर्शन करीब एक हजार लोंगों ने हिस्सा लिया जिसमें टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ और छात्र भी शामिल थे। प्रोफेसर प्रोमिला ने कहा कि अगर इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया जाता वे उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

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