राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मानवता के पूर्ण विकास के लिए पुरातन को सहेज कर नवीन को अपनाना होगा

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आई 1 न्यूज़ ब्यूरो रिपोट राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मानवता के पूर्ण विकास के लिए पुरातन को सहेज कर नवीन को अपनाना होगा ताकि भावी पीढ़ी अपनी समृद्ध संस्कृति एवं मूल्यों के साथ जुड़े रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सके। राज्यपाल आज सोलन में राज्य स्तरीय दो दिवसीय संस्कृत शिक्षक विमर्श सम्मेलन के स्थापना समारोह के अवसर पर उपस्थित संस्कृत विद्वानों को सम्बोधित कर रहे थे। आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारत की समृद्ध संस्कृति, साहित्य और वांगमय की पूर्ण जानकारी संस्कृत भाषा के माध्यम से प्राप्त हुई है। संस्कृत भारतीय संस्कृति का सार है और विश्व को सकारात्मक चिंतन संस्कृत भाषा की ही देन है। उन्होंने संस्कृत के विद्वानों से आग्रह किया कि वे देव भाषा संस्कृत को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए योजना बनाकर कार्य करें। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत को विश्व की सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है और व्याकरण की विभिन्न पद्धतियों ने यह सिद्ध किया है कि प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में संस्कृत श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व संस्कृत और संस्कृति को बड़े सुनियोजित तरीके से नष्ट किया गया ताकि भारतीय महाद्वीप को लम्बे समय तक पराधीन रखा जा सके। विदेशी शक्तियों को इसमें सफलता भी मिली। उस समय भारतीय शिक्षा पद्धति के मूल गुरूकुलों को नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि अब हमेें प्राचीन शिक्षा पद्धति की पुर्नस्थापना करनी होगी ताकि विशिष्ट भारतीय संस्कृति को सहेजकर रखा जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे भारतीय जीवन पद्धति एवं संस्कृति को अपनाएं। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्कृत महाविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को संस्कृत भाषा को आम जन में प्रचलित करने का बीड़ा उठाना होगा।इससे पूर्व, राज्यपाल ने मनीषी मण्डल के अध्यक्ष डाॅ. कुमार सिंह सिसोदिया तथा संस्कृत विद्यालय डोहगी, ऊना के प्राचार्य डाॅ. वत्सलम को सम्मानित किया। उन्होंने डाॅ. हरिदत्त शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय दर्शन’ का विमोचन भी किया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न संस्कृत विद्वानों को भी पुरस्कृत किया। हिमाचल संस्कृत अकादमी के सचिव डाॅ. मस्तराम शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा दो दिवसीय सत्र की विस्तृत जानकारी प्रदान दी। संस्कृत महाविद्यालय सोलन के कार्यवाहक प्रधानाचार्य उत्तम चैहान ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। संस्कृताचार्य प्रो. केशव शर्मा, प्रदेश भर से आए संस्कृत काॅलेजों के प्रधानाचार्य, जिला प्रशासन के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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